माता बज्रेश्वरी मंदिर

मां दुर्गा को समर्पित माता बज्रेश्वरी मंदिर का मूल निर्माण पांडवों द्वारा करवाया गया था, मंदिर परिसर की एक मूर्ति आने वाले संकट से पहले निकलती है आंसू.

माता बज्रेश्वरी मंदिर हिमाचल प्रदेश में कांगड़ा जिले के नगरकोट में स्थित है, यह मंदिर शक्तिपीठों में से एक है और प्रसिद्ध नौ देवी यात्रा में तीसरे स्थान पर आता है. बता दें की इस मंदिर पर इस्लामिक आक्रान्ताओं ने कई हमले किए और करोड़ों का सोना भी लुटा, मगर हिंदू राजाओं ने इसका पुननिर्माण करवा दिया. इसके अलावा कई बार भूकम्प के वार झेलने के बाद भी यह मंदिर अभी भी ज्यों का त्यों खड़ा हुआ है.

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ऑपइंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक इस मंदिर का मूल निर्माण पांडवों द्वारा करवाया गया. बताया जाता है की भगवान शिव के द्वारा माता सती की मृत देह को लेकर क्रोध में तांडव किए जाने के कारण भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता की देह को कई टुकड़ों में विभाजित कर दिया था. इस दौरान इस स्थान पर माता सती का बायाँ वक्ष गिरा था. यही कारण है कि यह मंदिर शक्तिपीठों में से एक माना जाता है, लेकिन मूल मंदिर की स्थापना महाभारत काल के दौरान पांडवों ने की थी. एक दिन पांडवों ने अपने स्वप्न में देवी दुर्गा को देखा था, जिसमें उन्होंने पांडवों को बताया कि वह नगरकोट गाँव में स्थित हैं और यदि पांडव चाहते हैं कि वे सुरक्षित रहने के साथ हमेशा विजयी रहें तो उन्हें उस क्षेत्र में एक मंदिर बनाना चाहिए. उसी रात पांडवों ने नगरकोट गाँव में उनके लिए एक भव्य मंदिर का निर्माण कराया.

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इस मंदिर में स्थित भैरव बाबा भी भविष्य में होने वाली अनहोनी घटना की पूर्व जानकारी देते हैं, कहा जाता है कि जब भी आसपास के क्षेत्र में कोई अनहोनी होने की आशंका होती है तो मंदिर में स्थापित लगभग 5000 साल पुरानी भैरव बाबा की प्रतिमा से पसीना और आँखों से आँसू गिरने शुरू हो जाते हैं. मंदिर के पुजारी इसके बाद विशाल यज्ञ का आयोजन करते हैं और माता बज्रेश्वरी देवी से संकट को टालने का अनुरोध करते हैं.

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By Sachin

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