माता त्रिपुर सुंदरी मंदिर

गोमती जिले में स्थित माता त्रिपुर सुंदरी मंदिर माता शक्ति को समर्पित हैं, युगों पूर्व इसी स्थान पर सुदर्शन से कटने के बाद माता सती का दाहिना पैर गिरा.

भारत के पूर्वोत्तर भाग के त्रिपुरा राज्य के गोमती जिले में माता पार्वती को समर्पित त्रिपुर सुंदरी मंदिर अत्यंत ही प्रसिद्ध हैं. सनातन धर्म में इस स्थान का बहुत महत्व माना जाता है, क्योंकि इसका वर्णन कई बड़े और पौराणिक ग्रन्थों में भी मिलता हैं. दरअसल यह स्थान भी 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता हैं, भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से कटने के बाद माता सती के शरीर का दाहिना पैर आकर यहां गिरा था. तब से इस मंदिर को माता त्रिपुर सुंदरी मंदिर के नाम से जाना जाता है.

ऑपइंडिया की विशेष रिपोर्ट के मुताबिक इस क्षेत्र को माताबाड़ी क्षेत्र के नाम से भी जाना जाता है और यह एक पहाड़ी के ऊपर स्थित है, यहां मां भगवती को त्रिपुर सुंदरी और उनके साथ विराजमान भैरव को त्रिपुरेश के नाम से जाना जाता है. त्रिपुरा में 15वीं शताब्दी के उत्तरार्ध के दौरान राजा धन्य माणिक्य का शासन था, बताया जाता है की एक रात राजा को स्वप्न में माता त्रिपुर सुंदरी ने तत्कालीन राजधानी उदयपुर में एक पहाड़ी के ऊपर अपनी उपस्थिति के बारे में बताया और उन्हें यह आज्ञा दी कि उस स्थान पर एक मंदिर का निर्माण कराया जाए.

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जिसके बाद राजा माणिक्य ने सन् 1501 के दौरान इस मंदिर का निर्माण कराया, इस मंदिर का निर्माण बंगाली वास्तुशैली एकरत्न के हिसाब से कराया गया है. बता दें की जिस पहाड़ी पर यह मंदिर स्थित है उसका आकार कछुए की पीठ के समान है, इसलिए इस स्थान को ‘कूर्म पीठ’ भी कहा जाता है. जानकारियों की अनुसार इस मंदिर के गर्भगृह में काले ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित दो प्रतिमाएँ स्थापित हैं. लगभग 5 फुट ऊंचाई की मुख्य प्रतिमा माता त्रिपुर सुंदरी की है जबकि 2 फुट की एक अन्य प्रतिमा, जिसे ‘छोटो मां’ कहा जाता है, माता चंडी की है.

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By Sachin

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