मोढ़ेरा सूर्य मंदिर

मेहसाणा जिले में भगवान सूर्यनारायण को समर्पित मोढ़ेरा सूर्य मंदिर वही स्थान है, जिस स्थान पर श्री राम ने ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति प्राप्त की थी.

भगवान सूर्यनारायण को भी भगवान विष्णु का ही अवतार माना जाता है और वहीं हैं जो इस संसार को निस्वार्थ प्रकाशित करते रहते हैं. किन्तु दुर्भाग्य की बात है की एक जमाने के उनके प्रसिद्ध मंदिरों में से एक में इस्लामिक आक्रांता के द्वारा लुट के बाद से आज तक पूजा नहीं की जाती है. जी हां, गुजरात के मेहसाणा जिले में मोढ़ेरा नामक गाँव में पुष्पावती नदी के किनारे स्थित मोढ़ेरा सूर्य मंदिर में अल्लाहुनिद खिलजी के आक्रमण और भगवान सूर्य की स्वर्ण प्रतिमा के लुट के बाद से यहां पूजा नहीं की जाती.

ऑपइंडिया की विशेष रिपोर्ट के मुताबिक मोढ़ेरा सूर्य मंदिर का वर्णन कई भारतीय पौरोणिक ग्रन्थों में मिलता है, जैसे की स्कंद पुराण और ब्रह्म पुराण के अलावा रामायण काल यानि की त्रेतायुग में इससे जुड़ा इतिहास मिलता है. बताया जाता है की प्रभु श्री राम जब रावण का वध करके लंका से अयोध्या लौट रहे थे, तब बिच में उन्होंने महर्षि वशिष्ट से स्वयं के ब्रह्म हत्या से मुक्त होने मार्ग पूछा तो महर्षि वशिष्ट ने उन्हें बताया की उन्हें इसी स्थान पर प्राश्चित कर इस पाप से मुक्त होना पड़ेगा.

इस घटना से यह तो स्पष्ट हो चूका है की मोढ़ेरा सूर्य मंदिर का अस्तित्व रामायण काल से भी पहले का है. बता दें की मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी में सूर्यवंशी सोलंकी राजा भीमदेव प्रथम ने कराया था, सूर्य भगवान सोलंकी राजाओं के कुल देवता थे और उन्हीं को समर्पित करते हुए भीमदेव प्रथम ने सन् 1026 में इस मंदिर का निर्माण कराया था. मोढ़ेरा सूर्य मंदिर तीन भागों में विभाजित है, गुढ़ामंडप, सभामंडप और कुंड. गुढ़ामंडप मंदिर का मुख्य भाग है जहाँ गर्भगृह स्थित है. गर्भगृह की दीवारों पर पौराणिक कथाओं का चित्रण किया गया है.

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By Sachin

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