कैलाश पर्वत

तिब्बत में स्थित कैलाश पर्वत हिंदुओं का सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक हैं, यहां भगवान शिव निवास करते हैं और अब तक कोई जीवित व्यक्ति इस पर्वत के शिखर तक नहीं जा सका है.

भव्य और दिव्य कैलाश पर्वत वर्तमान चीन के तिब्बत में स्थित हैं, इसके बावजूद भी भारतीय हिंदुओं की आस्था में कोई कमी नहीं आई और अभी भी उतने ही श्रद्धालु यहां कैलाश और मानसरोवर के दर्शन करने आते हैं. कैलाश पर्वत जितना बाहर से देखते पर सुंदर और दुर्लभ है उतना ही रहस्यमय और पौरोणिक मान्यताओं व कथाओं से भरे हुए हैं. इस पर्वत के पश्चिम और दक्षिण दिशा में मानसरोवर और राक्षसताल झील स्थित हैं और पर्वत से ब्रह्मपुत्र, सिन्धु, सतलुज इत्यादि नदियाँ भी निकलती हैं.

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हिंदू ग्रन्थों की मान्यताओं के अनुसार देवों के देवों महादेव शिव का निवास स्थान कैलाश पर्वत ही बताया गया है, हिंदुओं के लगभग सभी ग्रन्थों में कैलाश पर्वत का वर्णन मिलता हैं. सबसे रहस्यमय तथ्य इस पर्वत का यह है की आज तक कोई भी जीवित व्यक्ति पर्वत के शिखर तक नहीं जा सका है, बता दें की इस रहस्य के पीछे की गुत्थी को विज्ञान भी नहीं समझ पा रहा है क्योंकि दुनिया के सबसे उंचे पर्वत माउंट एवेरेस्ट पर कई बार बहुत से लोग चढ़ चुके हैं लेकिन कैलाश पर्वत पर नहीं.

दूसरा बड़ा रहस्य इस पर्वत के दक्षिण और पश्चिम दिशा में मानसरोवर और राक्षसताल हैं, ये दोनों झील एक दुसरे के समीप हैं और फिर भी हैरानी की बात यह है की मानसरोवर झील संसार की सबसे मीठी पानी की झील मानी जाती है और राक्षसताल झील विश्व की सबसे बड़ी खारे पानी की झील है. दोनों झील के इतने पास होने के बावजूद पानी में इतना बड़ा अंतर कैसे है? इसका जवाब भी विज्ञान को अब तक नहीं मिला है. वहीं गोरतलब है की कैलाश पर्वत की ऊंचाई लगभग 6 हजार 638 मीटर यानि की 21 हजार 778 फीट हैं और माउंट एवेरेस्ट की ऊंचाई 8 हजार 849 मीटर हैं.

विक्की पीडिया की जानकारियों के अनुसार कैलाश पर्वत को अस्टापद, गणपर्वत और रजतगिरि के नाम से भी जाना जाता है और मानसरोवर के साथ होने के कारण इस पुरे क्षेत्र को मानखंड भी कहा जाता है. पौरोणिक कथाओं की माने तो भगवान ऋषभदेव ने यहीं निर्वाण प्राप्त किया. श्री भरतेश्वर स्वामी मंगलेश्वर श्री ऋषभदेव भगवान के पुत्र भरत ने दिग्विजय के समय इसपर विजय प्राप्त करी. पांडवों के दिग्विजय प्रयास के समय अर्जुन ने इस प्रदेश पर विजय प्राप्त किया था. युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ में इस प्रदेश के राजा ने उत्तम घोड़े, सोना, रत्न और याक के पूँछ के बने काले और सफेद चामर भेंट किए थे. इनके अतिरिक्त अन्य अनेक ऋषि मुनियों के यहाँ निवास करने का उल्लेख प्राप्त होता है. जैन धर्म में इस स्थान का बहुत महत्व है, इसी पर्वत पर श्री भरत स्वामी ने रत्नों के 72 जिनालय बनवाये थे.

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3 thoughts on “कैलाश पर्वत: महादेव का निवास स्थान, जिसके शिखर पर अब तक कोई नहीं जा सका”
  1. महादेव की इच्छा से ही कोई भी इंसान परम पवित्र कैलाश पव॔त पर पहूंच सकता है ।कयोकी कैलाश पव॔त देवाधिदेव महादेव का निवास स्थान है जिनकी कृपा से संसार है जिनके क्रोध से सारी सृष्टी नष्ट हो जाएगी ।

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