नर्तियांग दुर्गा मंदिर

मेघालय में स्थित नर्तियांग दुर्गा मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक हैं, इस स्थान पर दक्ष पुत्री माता सती की बाईं जांघ धरती पर आ गिरी थी.

भारत के विभिन्न क्षेत्रों में दिव्य और चमत्कारिक मंदिरों के भंडार हैं, इनमें से अधिकतम मंदिरों का संबन्ध प्राचीन काल से भी हैं. नर्तियांग दुर्गा मंदिर उनमें से ही एक हैं, यह मंदिर मेघालय के पश्चिम जयंतिया हिल्स जिले में स्थित है. बता दें की यह मंदिर माता आदि शक्ति को समर्पित हैं और 51 शक्तिपीठों में से एक हैं. बताया जाता है की सुदर्शन चक्र से 51 हिस्सों में कटने के बाद माता सती की बाईं जांघ इसी स्थान पर आ गिरी थीं.

माता के इसी मंदिर से जुड़े इतिहास के बारे में बताएं तो प्रजापति दक्ष के उसी यज्ञ से होती हैं जिसमें उन्होंने महादेव का अपमान किया था. अपने पति का अपमान होते देख माता सती प्रजापति दक्ष से अत्यंत क्रोधित हो गई और उसी अग्नि कुंड में प्रवेश करके अपने प्राणों की आहुति दे दी. महादेव उनकी मृत्यु सहन नहीं कर सके, उन्होंने माता सती की मृत देह को हाथों में उठाकर तांडव करने लगे. भगवान शिव का क्रोध शांत करने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती की देह को 51 भागों में विभाजित कर दिया, वे सभी नीचे पृथ्वी पर अलग-अलग स्थानों पर आ गिरे. जिन्हें 51 शक्तिपीठों के नाम से भी जाना जाता है, उनमें एक पवित्र स्थान हैं.

ऑपइंडिया की एक विशेष रिपोर्ट के मुताबिक नर्तियांग के इस दुर्गा मंदिर में माँ दुर्गा जयंतेश्वरी के नाम से जानी जाती हैं. मंदिर की स्थापना के विषय में उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसकी स्थापना लगभग 600 वर्ष पूर्व हुई थी. उस समय जयंतिया साम्राज्य के शासक राजा धन मानिक हुआ करते थे. राजा ने नर्तियांग को जयंतिया शासनकाल की ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाया था. कहा जाता है कि एक रात राजा को स्वप्न हुआ, इस स्वप्न में स्वयं माँ दुर्गा ने राजा को नर्तियांग क्षेत्र के महत्व के बारे में बताया और कहा कि राजा इस क्षेत्र में एक मंदिर का निर्माण करें. माँ दुर्गा की आज्ञा पाकर राजा ने नर्तियांग में माँ दुर्गा के मंदिर का निर्माण कराया जो जयंतेश्वरी मंदिर के नाम से जाना गया.

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