दिल्ली

दिल्ली में घोटालों के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं, शराब और बस घोटाले के बाद अब टॉयलेट घोटाले की भी खबर सामने आ रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ईमानदारी का ढिंढोरा पीटने वाली आम आदमी पार्टी की कलई लगातार खुलती जा रही है। दिल्ली में आम आदमी पार्टी के एक बाद एक घोटाले सामने आते जा रहे हैं। शराब घोटाले के बाद अब अरविंद केजरीवाल के खास और उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया टॉयलेट घोटाले के आरोपों में घिर गए हैं।

मामले में कॉन्ग्रेस ने दिल्ली के उप राज्यपाल वीके सक्सेना को ज्ञापन सौंपकर मामले की जाँच की माँग की है। कॉन्ग्रेस ने आरोप लगाया है कि दिल्ली सरकार ने शहर में पब्लिक टॉयलेट के मैनेजमेंट का ठेका किसी एनजीओ को देने की बजाय नियमों को दरकिनार कर एक बैन की जा चुकी कंपनी को दे दिया। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि दिल्ली कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष अनिल कुमार के नेतृत्व में कॉन्ग्रेसियों ने दिल्ली के एलजी से मुलाकात कर शिकायत की।

इसमें भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए सार्वजनिक टॉयलेट की जाँच की माँग की गई है। आरोप है कि सिसोदिया ने जिस कंपनी को खुद ही बैन किया था, उसे ठेका क्यों दिया जा रहा है। कॉन्ग्रेस के दिल्ली अध्यक्ष का दावा है,  “18 अगस्त को 559 सार्वजनिक सुविधा परिसरों में 18620 शौचालयों के निर्माण के लिए एक डिबार्ड कंपनी को ठेका देने का निर्णय लिया गया था। दिल्ली सरकार टेंडर जारी करने के लिए पारंपरिक ई-प्रोक्योरमेंट वेबसाइट के बजाए GeM पोर्टल पर गई और सीधे एक प्रतिबंधित कंपनी को ठेका देने की पेशकश की।”

अनिल कुमार के मुताबिक, पिछले साल खराब प्रदर्शन का हवाला देते हुए खुद दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने ही उक्त कंपनी को बैन किया था। यहीं नहीं सरकार ने खुद ही कहा भी था कि खराब प्रदर्शन वाली कंपनी कॉन्ट्रैक्ट की प्रक्रिया में शामिल ही नहीं हो सकती है। गौरतलब है कि ये कोई पहली बार नहीं है जब दिल्ली सरकार विवादों में रही है। मनीष सिसोदिया शराब घोटाले के मामले में पहले से ही सीबीआई की रडार पर हैं।

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