निष्कलंक महादेव मंदिर

महाभारत के महान इतिहास की गवाही देने वाला निष्कलंक महादेव मंदिर गुजरात के अरब तट पर स्थित हैं, सालों पूर्व पांडवों ने यहीं अपने पाप धोए थे.

भारत में अब कुछ आधुनिकता का हवाला देने वाले लोग रामायण और महाभारत जैसे पवित्र ग्रन्थों को भारतीय इतिहास से नहीं जोड़ते और उन्हें एक काल्पनिक कथा मानते हैं, परन्तु वे एक पल के लिए तनिक भी नहीं सोचते की रामायण और महाभारत के प्रमाणित सत्येक साक्ष्य भारत की धरा पर ही मिलेंगें. ऐसे ही एक स्थल का नाम है निष्कलंक महादेव मंदिर, ये मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और महाभारत में इस शिवालय के बारे में बताया गया है की पांडवों के उस महायुद्ध के बाद नर हत्या के पाप यहीं आकर धोए थे.

ऑपइंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक जब महाभारत का वो भीषण युद्ध समाप्त हुआ तो पाँचों पांडवों को अपने ही परिवार वालों की हत्या और सेंकडों नरों की हत्या का अफ़सोस हो रहा था, वे इस पाप से मुक्ति चाहते थे और इसके लिए उन्होंने भगवान श्री कृष्ण से सलाह ली. माधव ने उन्हें एक काला ध्वज दिया और कहा की इस काले ध्वज को लेकर काली गाय का अनुसरण करो, जिस स्थान पर अनुसरण करने से गाय और ध्वज का रंग सफेद हो जाएगा उसी स्थान पर आपको इस नर हत्या के पाप से मुक्ति मिलेगी.

पांडवों ने भी श्री कृष्ण के कहने पर इसी तरह अलग – अलग स्थानों पर काली गाय का अनुसरण करते रहे, मगर विभन्न जगहों से उन्हें मायूस होकर ही लोटना पड़ा था. आखिर कार वर्तमान गुजरात के कोलियाक तट पर पांडवों ने जब अनुसरण किया गाय और ध्वज का रंग सफेद हो गया, ये देख पांडव प्रसन्न हुए और उन्होंने इसी स्थान पर भगवान शिव की तपस्या करी. भगवान शिव ने 5 स्वयंभू शिवलिंग के रूप में पाँचों भाइयों को अलग अलग रूप में दर्शन दिए और सबको पाप मुक्त यानि की निष्कलंक कर दिया. जिसके बाद से ही इस स्थान को निष्कलंक महादेव मंदिर के नाम से पहचाना जाता है.

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