VHP

विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अनुसार गरबा हिंदुओं की आस्था और श्रद्धा का विषय है, यह कोई सार्वजनिक आयोजन नहीं इसलिए गरबा पंडालों में केवल हिंदू भक्तों को ही प्रवेश मिलना चाहिए।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार नवरात्रि के दौरान होने वाला गरबा और डांडिया का कार्यक्रम वैसे तो गुजरात में सबसे अधिक प्रसिद्ध है, लेकिन इसे बड़े ही धूमधाम से देशभर में मनाया जाता है। इस बीच इन आयोजनों में शामिल होने को लेकर विश्व हिंदू परिषद ने आयोजकों से बड़ी अपील की है। VHP का कहना है कि ये कार्यक्रम हिंदुओं की आस्था का मामला है। इसको लेकर पिछले साल एक वीडियो भी वायरल हो रहा है:-

इसलिए इसमें शामिल होने वाले लोगों के लिए आधार कार्ड के जरिए प्रवेश अनिवार्य कर दिया गया है। वीएचपी का कहना है कि गरबा स्थलों पर आधार कार्ड की जाँच की जानी चाहिए। अगर व्यक्ति हिंदू हो तो ही उसे कार्यक्रम में प्रवेश दिया जाना चाहिए। नवरात्रि में होने वाले गरबा नृत्यों का हिंदू आस्था और धर्म से गहरा नाता है। हिंदू धर्म में इसका अपना एक विशेष महत्व है।

मान्यता है कि गरबा नृत्य और डांडिया का सीधा संबंध माँ दुर्गा और महिषासुर के बीच हुए युद्ध से है। ऐसी कथा है कि गरबा के दौरान जिस रंगीन डांडिए का इस्तेमाल किया जाता है, वो माँ दुर्गा के तलवार को प्रदर्शित करता है। अब इस पवित्र गरबे में आधार कार्ड की अनिवार्यता को लेकर विश्व हिंदू परिषद द्वारा कहा जा रहा है कि गरबे के दौरान दूसरे धर्मों के लोग इसमें आते हैं और महिलाओं से छेड़छाड़ के साथ ही लव जिहाद जैसी घटनाएँ बढ़ती हैं।

गौरतलब है कि पिछले साल गरबे के दौरान ऐसी कई घटनाएँ सामने आई थीं, जिनके सामने आने के बाद काफी विवाद भी हुआ था। ऐसी ही घटनाओं से हिंदू महिलाओं को बचाने के लिए वीएचपी ने ये कदम उठाया है। पिछले साल 2021 में नवरात्रि के दौरान मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में गरबा के आयोजन के दौरान मुस्लिम लड़कों ने इन आयोजनों में जाकर हिंदू लड़कियों को फंसा लिया था। बाद में इसको लेकर काफी विवाद भी हुआ था।

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