श्री कृष्ण भगवान को समर्पित जगन्नाथ मंदिर की जमीन बेचने जा रही है, ओडिशा की BJD सरकार के कानून मंत्री प्रताप जेना ने संपत्ति बेचने की बात सामने रखी.

जगन्नाथ मंदिर

राज्य सरकार ने भगवान के इस घर की ओडिशा और 6 दुसरे राज्यों में भी मंदिर की संपत्ति बचेगी. राज्य की वर्तमान BJD सरकार के कानून मंत्री प्रताप जेना ने भारतीय जनता पार्टी के विधायक मोहन चरण मांझी के एक प्रश्न का जवाब जेना ने लिखित में दिया.

जगन्नाथ मंदिर पर सरकार का लिखितनामा

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ओडिशा की BJD सरकार के कानून मंत्री प्रताप जेना ने लिखित में कहा की “तत्कालीन राज्यपाल बीडी शर्मा की अध्यक्षता में गठित एक समिति की सिफारिशों के अनुसार, सरकार मंदिर की 35,272.235 एकड़ भूमि की संपत्ति बेचने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है”.

जेना ने विधानसभा में कहा की “भगवान जगन्नाथ ओडिशा के 30 में से 24 जिलों में फैले 60,426.943 एकड़ के मालिक हैं जिसमें से मंदिर प्रशासन 34,876.983 एकड़ में राइट्स ऑफ राइट्स तैयार कर सकता है और आयोग की सिफारिश के अनुसार राज्य सरकार की अनुमोदित नीति यानि की समन नीति के तहत जमीन बेचने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं”.

जगन्नाथ मंदिर का महत्व

भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण को समर्पित भागवान श्री जगन्नाथ का ये मंदिर ओडिशा के तटीय शहर पूरी में स्थित है, यह मंदिर भारत के सबसे प्राचीनतम मंदिरों में से एक माना जाता है. इस मंदिर को हिंदुओं के चार धामों में से एक धाम माना जाता है, जगन्नाथ शब्द का अर्थ जगत के स्वामी होता है. इस मंदिर में तीन मूर्तियाँ विराजमान हैं.

भगवान जगन्नाथ यानि श्री कृष्ण, बलभद्र यानि की श्री बलराम (श्री कृष्ण के बड़े भाई) और सुभद्रा (श्री कृष्ण की छोटी बहन जिन्हें योगमाया का रूप भी माना जाता है और महाभारत काल में चर्क्व्यु में फंसने वाला अभिमन्यु अर्जुन और सुभद्रा का ही पुत्र था) की बाल्यकाल वाली तीन मूर्तियाँ शुशोभित हैं.

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