हनुमानजी

आज भगवान श्री राम के अनन्य भक्त श्री हनुमान जी की जयंती है और इसके लिए हमारी ओर से आप सभी को बधाई व शुभकामनाएं।

इस लेख में आपको राम भक्त हनुमान के बारे में कुछ रोचक और रहस्यमय चीजों के बारे में बताने वाले हैं, जैसा की आप सभी जानते ही हैं की हनुमानजी ने ही रावण की सोने की लंका जला दी थी और भगवान राम के छोटे भाई लक्ष्मण को जब शक्ति बाण लगा तो पूरा पर्वती ही अपने एक हाथ पर ही उठा लाए थे, ऐसे वीर के लिए कुछ लिखने के लिए शब्द ही कम पड़ जाते हैं। लेकिन हमने तो बस प्रयास किया है:-

हनुमान जी के जीवन के सबसे बड़े रहस्य

  • भगवान राम से पहले जन्मे थे हनुमानजी हनुमानजी का जन्म कर्नाटक के कोपल जिले में स्थित हम्पी के निकट बसे हुए गांव में हुआ था। मतंग ऋषि के आश्रम में ही हनुमानजी का जन्म हुआ था। भगवान श्रीराम के जन्म से पहले हनुमान जी का जन्म हुआ था। हनुमानजी चैत्र मास की शुक्ल पूर्णमा के दिन जन्मे थे।
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हनुमान जयंती न्यूज कप
  • हनुमानजी के 108 नाम हनुमानजी के 108 नाम है। संस्कृत में हर  एक नाम का मतबल उनके जीवन के अध्यायों का सार बताता है। यही कारण है कि उनके नाम का जाप करने भर से हनुमत कृपा मिलती है।
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  • माता जगदम्बा के सेवक है हनुमानजी हनुमानजी भगवान श्रीराम के साथ ही माता जगदम्बा के सेवक माने गए हैं और जब माता चलती हैं, तो आगे हनुमान जी चलते हैं और उनके पीछे भैरव बाबा। यही कारण है कि जहां भी देवी का मंदिर होता है, वहां हनुमानजी और भैरव जी के मंदिर जरूर होते हैं।
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  • हनुमानजी के पसीने का रहस्य हनुमानजी के पसीने का रहस्य बहुत ही आश्चर्यजनक है। उनके पसीने से उनका एक पुत्र हुआ था। दरअसल हनुमानजी पूरी लंका को भस्म कर समुद्र में अपनी पूंछ की आग बुझाने और अपने शरीर के ताप को कम करने के लिए विश्राम कर रहे थे तब उनके शरीर से टपका पसीना एक मादा मगरमच्छ ने निगल लिया। उनके पसीने की शक्ति से उनका एक पुत्र हुआ मकरध्वज।
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  • प्रभु पर ब्रह्मास्त्र भी है बेअसर ब्रह्मदेव ने हनुमानजी को तीन वरदान दिए, जिसमें सबसे प्रमुख और शक्तिशाली वरदान था, उन पर ब्रह्मास्त्र का असर न होना। ब्रह्ममांड में ईश्वर के बाद यदि कोई एक शक्ति मानी गई है तो वह हनुमान जी को माना गया है।  महावीर विक्रम बजरंगबली के समक्ष किसी भी प्रकार की मायावी शक्ति ठहर नहीं सकती है।
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  • सर्वप्रथम हनुमानजी ने लिखी थी रामायण हनुमानजी ने हिमालय पर्वत पर रामायण अपने नाखूनों से उकेर कर लिखा था, लेकिन जब तुलसीदास अपनी रामायण हनुमानजी को दिखाने वहां पहुंचे तो उनकी रामायण देख वह दुखी हो गए, क्योंकि वह रामायण बहुत ही सुंदर लिखी गई थी और उनकी रामायण उसके आगे फीकी लगी। हनुमानजी ने जब तुलसीदास के मन की बात जानी तो वह अपनी लिखी रामायण को तुरंत ही मिटा दिए।
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  • कल्प के अंत तक शरीर में रहेंगे हनुमान हनुमानजी को इंद्रदेव से इच्छा मृत्यु का वरदान मिला है, लेकिन भगवान श्रीराम के निर्देशानुसार उन्हें कलयुग के अंत तक रहना ही है। भगवान राम के वरदान अनुसार कल्प का अंत होने पर उन्हें उनके सायुज्य की प्राप्ति होगी। सीता माता के वरदान के अनुसार वे चिरजीवी रहेंगे। रघुवीर श्रीमद्भागवत के अनुसार हनुमान जी कलियुग में गंधमादन पर्वत पर निवास करते हैं।
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