भगवान नरसिंह

जैसे की आप सभी जानते हैं की कुतुब मीनार परिसर विदेशी आक्रांताओं ने करवाया, लेकिन क्या आप जानते हैं? इसी परिसर में भगवान नरसिंह का अपमान भी होता है।

जी न्यूज की विशेष रिपोर्ट के मुताबिक कुतुब मीनार को बनाने वाले मुस्लिम शासकों ने कैसे जानबूझकर मंदिरों से तोड़ी गई हिंदू देवी देवताओं की प्रतिमाओं को ऐसे स्थानों पर रखा, जहां आने जाने वाले लोगों के पैर उन पर पड़ते रहें। ऐसा करके ये शासक हिंदू संस्कृति का अपमान करते थे और चाहते थे कि आने वाली पीढ़ियां भी इस अपमान को याद रखें।

आपको बताते चलें की 12वीं शताब्दी में दिल्ली सल्तनत की स्थापना के बाद कुतुबुद्दीन ऐबक ने 27 हिंदू और जैन मंदिरों को तुड़वाकर कुतुब मीनार परिसर में एक विशाल मस्जिद का निर्माण कराया था और बाद में ध्वस्त किए गए मंदिरों के ऊपर ही कुतुब मीनार बनाई गई थी। कुतुब मीनार परिसर में आज भी हिंदू देवी देवताओं की कई प्रतिमाएं मौजूद हैं।

इनमें जिस कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद को भारत की सबसे पुरानी मस्जिद माना जाता है, उसकी पश्चिमी दीवार पर भगवान गणेश की मूर्ति को कैद करके रखा गया है। माना जाता है कि, ये मूर्ति उन्हीं हिंदू मंदिरों का हिस्सा थी, जिन्हें कुतुबद्दीन ऐबक ने तोड़ कर यहां मस्जिद और कुतुब मीनार का निर्माण कराया था। असल में कुतुबद्दीन ऐबक दिल्ली का नक्शा बदला देना चाहते थे।

इसलिए उन्होंने जल्दबाजी में कई मंदिरों को नष्ट किया और फिर इन्हीं मंदिरों के मलबे से मस्जिद और दूसरे स्मारकों का निर्माण करा दिया। यही वजह है कि आज भी इन स्मारकों में हिंदू मंदिरों की पहचान और विरासत दिखती है। कुतुब मीनार कॉम्प्लेक्स 24 हजार वर्ग मीटर के क्षेत्र में फैला है और यहां मस्जिद के अलावा एक द्वार भी है, जिसे अलाई दरवाजा कहते हैं।

गौरतलब है की इसका निर्माण खिलजी वंश के दूसरे शासक अलाउद्दीन खिलजी ने करवाया था। इस अलाई दरवाजे के आसपास जितने भी पत्थर रखे हैं, उन पर हिंदू देवी देवताओं की प्रतिमाएं बनी हुई हैं। इनमें भगवान नरसिंह की 1200 वर्ष पुरानी मूर्ति भी है। लेकिन इसे दुर्भाग्य ही कहेंगे कि आज लोग इन पत्थरों पर खड़े होकर अपनी सेल्फी खींचते हैं। देखें पूरा वीडियो:-

बताया यह भी जा रहा है की दिल्ली सल्तनत के मुस्लिम बादशाहों ने इसलिए इन प्रतिमाओं को पूरी तरह नष्ट नहीं किया क्योंकि वो चाहते थे कि भविष्य में इन मूर्तियों का इसी तरह अपमान होता रहे और भारत के लोग अपनी गुलामी को हमेशा याद रखें और आज ऐसा ही हो रहा है। वहीं आज आप ये तो जानते हैं कि कुतुब मीनार का निर्माण, कुतुबुद्दीन ऐबक ने करवाया था, लेकिन आप ये नहीं जानते कि इस मीनार के नीचे कई मंदिरों के अवशेष दबे हुए हैं। जिन्हें हिन्दुओं से नफरत की वजह से तोड़ा गया था।

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