असम

असम सरकार अवैध मदरसों और उनमें हो रहे देश विरोधी कृत्यों के खिलाफ कार्यवाही जारी है, इसी बीच एक वीडियो सामने आया है।

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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एक कहावत तो सुनी होगी, ‘जथा राजा, तथा प्रजा’। मतलब ये कि राजा का व्यवहार और उसकी कार्यप्रणाली जैसी होगी, उसका सीधा सा असर उसकी प्रजा पर पड़ता है। प्रजा भी अपने राजा के पदचिन्हों का अनुकरण करती है। असम में भी कुछ ऐसा ही होता दिख रहा है। सबसे पहले आप इस वीडियो को पूरा देखें:-

इस्लामिक कट्टरपंथ और आतंकवाद का अड्डा बने मदरसों को असम सरकार ने ध्वस्त करना शुरू किया तो वहाँ की जनता भी आगे आ गई। लोगों ने आगे बढ़कर खुद ही एक मदरसे को धवस्त कर दिया। ताजा मामला असम की राजधानी गुवाहाटी से 134 किलोमीटर पश्चिम में स्थित गोलपारा की है, जहाँ स्थानीय लोगों ने अस्थायी तौर पर बनाए गए मदरसे को तहस-नहस कर दिया।

लोगों का आरोप है कि यहाँ से इस्लामिक जिहादी गतिविधियाँ संचालित की जा रही थीं। जिस मदरसे को पूरी तरह से तोड़ दिया गया वो गोलपारा के दरोगार अलगा में स्थित था। इस मदरसे का संचालक जलालुद्दीन शेख नाम का व्यक्ति था। स्थानीय लोगों ने मदरसे के साथ ही उसी के बगल में स्थित एक घर को भी ध्वस्त कर दिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दावा किया जा रहा है कि मदरसे के संचालक जलालुद्दीन शेख ने 2020 में अनिमुल इस्लाम, उस्मान, मेहदी हसन और जहाँगीर आलोम को बतौर मौलवी नियुक्त किया था।

लेकिन बाद में खुलासा हुआ कि मदरसे में शिक्षक बने दो लोग आतंकी संगठन अलकायदा और बांग्लादेश की अंसारुल बांग्ला टीम के आतंकी थे। दोनों ही फरार हैं। गौरतलब है कि असम में हिमंत सरमा सरकार ने अब तक इस्लामिक जिहाद में शामिल तीन मदरसों को तबाह कर दिया है। इसके साथ ही मौलानाओं समेत 3 दर्जन से भी अधिक लोगों की गिरफ़्तारी हुई है। आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई के बाद भी असम में एआईयूडीएफ के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने इस कार्रवाई का विरोध किया है। बदरुद्दीन का कहना है कि मदरसा सार्वजनिक संपत्ति है, जिसे नोटिस जारी किए बिना ध्वस्त नहीं किया जा सकता है।

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