बंगाल

पश्चिम बंगाल में बढ़ती हिंसा को देखते हुए एक NGO ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लागु करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करी.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार चुनावी नतीजों के बाद पश्चिम बंगाल में लगातार हिंसा की खबरें बढ़ती जा रही हैं, ऐसे में सोशल मीडिया पर इसके खिलाफ़ राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग की जा रही है. लेकिन अब इस मुद्दे को गम्भीरता से लेते हुए ‘इंडिक कलेक्टिव ट्रस्ट’ नामक NGO ने देश के सर्वोच्च न्यायालय यानि सुप्रीम कोर्ट में संवैधानिक ढांचे को ध्वस्त करने का हवाला देते हुए राज्य में राष्ट्रपति शासन को लागू करने की मांग करी हैं.

जानिए आर्टिकल 356 क्या है?

बता दें की भारतीय संविधान में आर्टिकल 356 का जिक्र मिलता है, बता दें की ये आर्टिकल भारत के राष्ट्रपति को किसी भी राज्य में उस राज्य के राज्य सरकार के कार्यकाल के दौरान भी राष्ट्रपति शासन लागु करने का अधिकार देता है. कहने का तात्त्पर्य यह है की राष्ट्रपति शासन लागु होने के बाद राज्य पर उस राज्य की तत्काल राज्य सरकार का कोई अधिकारिक अधिकार नहीं रहता है. यह एक प्रकार से राज्य आपातकाल ही होता है.

भारतीय संविधान में आर्टिकल 356 के मुताबिक ‘यदि राष्ट्रपति संतुष्ट है कि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिसमें राज्य की सरकार संविधान के प्रावधानों के अनुसार कार्य नहीं कर रही है’. इसके अनुसार यदि राज्य के संवैधानिक मशीनरी या विधायिका संवैधानिक मानदंडों का पालन करने में विफल रहती है तो राज्य के राज्यपाल की रिपोर्ट मिलने पर केंद्र सरकार की सलाह पर राष्ट्रपति राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की अनुमति देता है.

बताते चलें की राज्य में जब किसी भी के बनने के आसार न दिखाई दें यानि की कोई भी पार्टी राज्य में अपना बहुमत ना स्पस्ट कर पाएं तब भी राष्ट्रपति शासन लागू कर सकते हैं.

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By Sachin

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