ज्ञानवापी में ASI सर्वेक्षण की अनुमति के बाद आगरा की जामा मस्जिद में दबी भगवान श्रीकृष्ण प्राचीन मूर्तियों को निकालने की याचिका दायर की गई है.

हाल ही में वाराणसी कोर्ट ने वाराणसी के जज्ञानवापी मस्जिद में ASI सर्वेक्षण के आदेश दिए हैं, दावा किया जा रहा है की यह मस्जिद पूर्व में इसी स्थान पर स्थित भगवान विश्वनाथ के मंदिर को तोड़कर बनाई गई है. इसलिए कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व विभाग को आदेश दिए हैं की वो अब इसकी निष्पक्ष जांच करें.

श्रीकृष्ण

श्रीकृष्ण मूर्तियों को लेकर याचिका

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मथुरा की अदालत में एक बार फिर से सन् 1670 में ध्वस्त किए गए श्रीकृष्ण मंदिर की मूर्तियों को आगरा फोर्ट की मस्जिद से निकलवाने की माँग की गई है, यह याचिका भगवान श्री कृष्ण की प्राचीन मूर्तियों को लेकर दायर की गई है. यह याचिका श्री कृष्ण विराजमान के माध्यम से श्रीकृष्ण जन्मस्थान की 13.37 एकड़ जमीन को लेकर किए गए दावे के वादी शैलेंद्र सिंह व अन्य ने की है.

याचिका में मथुरा के सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में दिए गए प्रार्थना पत्र में कहा की “इतिहासकारों का मानना है कि केशव राय निवासी लला कटरा मथुरा द्वारा 33 लाख रुपए की लागत से बनवाए गए भव्य मंदिर को औरंगजेब ने जनवरी 1670 में ध्वस्त करा दिया था और मंदिर की प्रतिमाओं को मंदिर से निकाल कर छोटी मस्जिद दीवाने खास जामा मस्जिद आगरा फोर्ट में दफना दी थीं, जिससे उस पर पैर रखकर मुसलमान चढ़कर जाएँ और दुआ माँग सकें”.

श्रीकृष्ण मूर्तियों की करी मांग

याचिका को लेकर वादी शैलेंद्र सिंह ने कहा की “उन्होंने अदालत से माँग की है कि डायरेक्टर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को वैज्ञानिक अन्वेषण करके प्रतिमाओं का उत्खनन कर उन्हें पुन: स्थापित करने का आदेश दिया जाए, अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 10 मई की तारीख तय की है”.

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