गजवा-ए-हिंद

अफगानिस्तान पर तालिबानियों के कब्जे के बाद भारत में बैठे कुछ कट्टरपंथी विचारधारा के लोग भारत में ‘गजवा-ए-हिंद’ के सपने देखने लगे हैं.

अफगानिस्तान में जो कट्टरता के नशे में धुत लोगों ने आग लगाई है, वो केवल अफगानिस्तान तक ही सिमित नहीं रहने वाली हैं. बल्कि उस आग की कुछ लपटें भारत में भी देखीं जा सकती हैं. अफगानिस्तान में कट्टर इस्लामिक संगठन तालिबान के राज के बाद भारत में बैठे कुछ लोग जो उसी कट्टरता का समर्थन करते आ रहे हैं वे बहुत खुश हैं और ‘गजवा-ए-हिंद’ का सपना देखने लगे हैं. उन्हें लगता है जिस तरह मुट्ठी भर अफगान सेनिकों को तालिबान ने परस्त कर दिया उसी तरह भारत की मजबूत सेना को भी वो हरा देंगें, लेकिन ये केवल उनका एक भ्रम है.

ज़ी न्यूज़ के शो DNA में चैनल के एडिटर चीफ़ सुधीर चौधरी ‘गजवा-ए-हिंद’ के बारे में बताते हुए कहते हैं की “इस्लाम के कुछ धर्म ग्रंथों में गजवा-ए-हिंद का जिक्र करते हुए कहा गया है कि खुरासान से एक इस्लामिक सेना भारत पर हमला करेगी. आपको जानकर हैरानी होगी कि खुरासान जिस इलाके को कहा जाता है उसमें आज का अफगानिस्तान और पाकिस्तान और ईरान के कुछ इलाके शामिल हैं. कट्टर इस्लाम को मानने वाले कहते हैं कि इतने वर्षों में गजवा-ए-हिंद इसलिए नहीं हो पाया क्योंकि इससे पहले भारत पर जितने मुसलमान आक्रमणकारियों ने हमला किया था वो इस्लाम की कट्टर विचारधारा से तो प्रेरित थे, लेकिन उनका असली सपना भारत के धन और दौलत को लूटना था. लेकिन जो लोग गजवा-ए-हिंद करेंगे वो भारत को लूटने नहीं बल्कि भारत को एक इस्लामिक राष्ट्र में बदलने के इरादे से हमला करेंगे. लेकिन गजवा-ए-हिंद की थ्योरी के मुताबिक उससे पहले कट्टर इस्लाम को दुनिया के दूसरे इलाकों में मजबूत होना होगा. अफगानिस्तान इसका सिर्फ एक उदाहरण है”.

बता दें की ‘गजवा-ए-हिंद’ की आग तब से उठी है जब से काबुल के अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आत्मघाती हमले की जिम्मेदारी आतंकवादी संगठन ISIS-खुरासान ने ली है. गौरतलब है की खुरासान नामक आतंकी संगठन ISIS की एक शाखा है, जिसका मतलब है ‘गजवा-ए-हिंद’.

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