रामप्पा मंदिर

वारंगल में स्थित काकतीय रुद्रेश्वर अथवा रामप्पा मंदिर का निर्माण जल में तैरने वाले पत्थरों से किया गया है, यह संभवतः एक मात्र ऐसा मंदिर हैं जो शिल्पकार के नाम पर है.

भारतीय संस्कृति को संरक्षित रखने में दक्षिण भारत की अहम भूमिका हैं, उस क्षेत्र में ऐसे – ऐसे मंदिर हैं जिसके रहस्य आज भी वैज्ञानिकों के लिए विचारणीय बने हुए हैं. इसी सूचि में प्रसिद्ध रामप्पा मंदिर का नाम भी शामिल है, इस मंदिर को काकतीय रुद्रेश्वर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है. बता दें की हाल ही में UNESCO द्वारा तेलंगाना के वारंगल में स्थित रामप्पा मंदिर को विश्व विरासत स्थलों की सूचि में भी शामिल कर किया.

ऑपइंडिया की विशेष रिपोर्ट के मुताबिक तेलंगाना में तत्कालीन काकतीय वंश के महाराजा गणपति देवा ने सन् 1213 के दौरान एक भव्य एवं विशाल शिव मंदिर के निर्माण का निर्णय लिया. गणपति चाहते थे कि इस मंदिर का निर्माण इस प्रकार किया जाए कि आने वाले कई वर्षों तक इसका गुणगान होता रहे. मंदिर निर्माण का कार्य उन्होंने अपने शिल्पकार रामप्पा को दिया. रामप्पा ने भी अपने महाराजा द्वारा दिए गए आदेश का अक्षरशः पालन किया और एक भव्य एवं सुंदर मंदिर का निर्माण किया.

मंदिर की भव्यता देखकर राजा अत्यंत प्रसन्न हुए और इस मंदिर का नाम शिल्पकार रामप्पा के नाम पर ही रख दिया. गौरतलब है की मंदिर अपने निर्माण के समय से अब तक ज्यों का त्यों टिका हुआ है, इसे अब तक कोई नुकसान नहीं हुआ. इस रहस्य को खोजने के लिए जब पुरातत्व विभाग की टीम के सर्वे किया एक ओर रहस्य उनके सामने निकला, दरअसल उन्हें मंदिर पत्थरों की टेस्टिंग से पता चला ये पत्थर पानी में भी तैर सकते हैं और तब से अब तक कोई भी इस रहस्य को सुलझा नहीं पाया है. बता दें रामप्पा मंदिर महादेव शिव को समर्पित हैं.

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