पुलिस

राजस्थान से हिन्दू घृणा वाली कुछ तस्वीरें सामने आ रही है। एक पुलिस अधिकारी ने कहा है की बंदर-भालू को हवा में उड़ाकर दिखाओ एक बार।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कॉन्ग्रेसी शासन में काम करने वाले अफसरों की अक्सर मति भ्रष्ट हो ही जाती है और हो भी क्यों ने कुछ साल पहले कॉन्ग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष रहीं सोनिया गाँधी ने भी सनातन संस्कृति का मजाक उड़ाया था। उन्होंने रामायण और रामसेतु को काल्पनिक करार दे दिया था। हालाँकि, विज्ञान ने उनके कथन को पूर्णत: गलत सिद्ध कर दिया। बाद में ये साबित भी हो गया कि रामसेतु का अस्तित्व था।

अब राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार के एक अधिकारी ने सोशल मीडिया पर हिंदू धर्म को लेकर विवादित बयानबाजी की है। इस पुलिस अधिकारी का नाम हरि चारण मीणा है। ये आरपीएस अधिकारी हैं। पुलिस अधिकारी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर हिंदू धर्म का अपमान करते हुए लिखा, “अगर किसी को लगता है तो वो बिना पंख के बंदर और भालू को उड़ा सकता है तो आज भी कोई कोर्ट के सामने उड़ा कर दिखाए। पूरा देश देखने को तैयार है।”

यहीं नहीं मीणा ने रामायण और महाभारत महाकाव्यों को मिथक करार दिया है। पुलिस अधिकारी का दावा है कि भारत के इतिहास में लिखा है कि रामायण और महाभारत की प्रमाणिकता को सिद्ध नहीं किया जा सका। हरि चारण मीणा की बयानबाजी यहीं नहीं रुकी। उन्होंने जयपुर के महाराजा जयसिंह द्वितीय को मुगलों का नौकर करार देते हुए कहा, “अपने चारण, भाट, दरवारी, इतिहास लेखकों ने तो महाराजा जयसिंह द्वितीय ही बताया है। अब काबुल के शिलालेख मुगल बाबर के वंशजों का नौकर बताएँ तो हम क्या करें ? हम देश के साथ हैं।”

इसके साथ ही पुलिस अधिकारी ने आर्यों को लेकर भी विवादित बयान दिए और कहा, “जब आर्य संस्कृति का उत्तर भारत से दक्षिण में गमन हुआ तो वहाँ के आदिवासी राजाओं, योद्धाओं बाली, सुग्रीव, जावमंत, हनुमान जैसों को बंदर, भालू के समान दर्जा दिया गया था।” गौरतलब कि देश में जिस किसी भी राज्य में कॉन्ग्रेस की सरकार है, वहाँ पर हिंदुओं को प्रताड़ित किया जाना और उनकी आस्था को नित दिन कुचलने की कोशिश करना नई बात नहीं है।

भले ही राहुल गाँधी चुनावी मौसम में जनेऊधारी पंडित बन जाएँ, लेकिन सत्य तो यही है कि वो और उनकी माँ सोनिया गाँधी समेत उनके कई बड़े नेता हिंदू धर्मग्रंथों को काल्पनिक करार दे चुके हैं। बताया जा रहा है कि इस पुलिस अधिकारी पोस्ट को लेकर सोशल मीडिया पर बवाल खड़ा हो गया, हिन्दू संगठनों द्वारा भी इसका खूब विरोध कर रहे हैं।

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