रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग

महादेव को समर्पित बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग को भगवान राम ने भगवान शिव के दर्शन के बाद इस पवित्र स्थान पर स्थापित किया था.

रामायण काल में भारत के दक्षिण में स्थित अत्यंत प्राचीन नगर रामेश्वरम का आरंभ हुआ, क्योंकि इसी नगर में समुद्र टापू पर महादेव को समर्पित बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग स्थापित हैं और जिसे भगवान श्री राम ने स्वयं देवों के देव महादेव के दर्शन के बाद स्थापित किया था. दरअसल रावण की नगरी लंका जाने के लिए विशाल समुद्र सेना सहित पार करना थोड़ा कठिन था, इसलिए भगवान राम ने महादेव की आराधना की और शिवजी ने भी उन्हें निराश न करते हुए उनका मार्गदर्शन किया.

हिंदुओं के पौरोणिक ग्रन्थों और रामायण में भी वर्णित है की इस स्थान पर ज्योतिर्लिंग की स्थापना भगवान श्री राम के द्वारा की गई थी. बता दें की माता सीता को छोड़ने के लिए भगवान राम जब पूरी वानर सेना सहित लंका जा रहे थे तब मार्ग में उनके सामने सबसे बड़ी बाधा यह समुद्र ही बना. इसके लिए प्रभु श्री राम ने महादेव की वंदना करने लिए मिट्टी के शिवलिंग का निर्माण किया. श्री राम की आराधना से प्रसन्न होकर स्वयं एक ज्योति स्वरूप में प्रकट हुए और उन्हें समुद्र पर पत्थरों के सेतु निर्माण का सुझाव दिया.

महादेव के आदेशानुसार वानर सेना ने मिलकर एक महासेतु का निर्माण किया. जिसके बाद भगवान राम सेना सहित लंका पहुंचे और युद्ध में रावण से विजयी हुए. जब युद्ध जीतकर श्री राम वापस आ रहे थे जब उन्होंने यहां रुककर हनुमानजी को काशी से एक शिवलिंग लाने कहा, हनुमान पवन – सुत थे. बड़े वेग से आकाश मार्ग से चल पड़े और शिवलिंग लेके आए. यह देखकर राम बहुत प्रसन्न हुए और रामेश्वर ज्योतिर्लिंग के साथ काशी के लिंग कि भी स्थापना कर दी. छोटे आकार का यही शिवलिंग रामनाथ स्वामी भी कहलाता है. ये दोनों शिवलिंग इस तीर्थ के मुख्य मंदिर में आज भी पूजित हैं.

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