कोरोना के इस कठिन समय में भी देश की मीडिया का एक हिस्सा पत्रकारिता का मजाक बनाने में लगा हुआ है, रवीश कुमार ने लखनऊ को लाशनऊ कह दिया.

देश में इस समय कोरोना महामारी का कोहराम मचा हुआ है, करोड़ों लोग संक्रमित हुए हैं और लाखों लोगों की मौतें दर्ज की गई है. लेकिन इन सब को ध्यान में न रखते हुए मीडिया का एक हिस्सा केवल वामपंथी विचारधारा का प्रसार करता दिखाई दे रहा है. लोगों को कोरोना से सुरक्षा के लिए सरकार द्वारा दिए गए निर्देश समझाने के बजाए भ्रम और डर का मौहोल पैदा कर रहे हैं.

रवीश कुमार ने किया पत्रकारिता को शर्मसार

समाचार नेटवर्क के हिंदी समाचार चैनल ‘एनडीटीवी इंडिया’ में संपादक रवीश कुमार ने हाल ही में पत्रकारिता को शर्मसार करने वाली हरकत की है, उन्होंने कोरोना पर चिंता जताने के बजाए अपने अधिकारिक फेसबुक अकाउंट पर एक गैरजिम्मेदाराना पोस्ट की, जिसमें उन्होंने लिखा की “लखनऊ बन गया है लाशनऊ, धर्म का नशा बेचने वाले लोगों को मरता छोड़ गए”.

रवीश

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर यह भी आरोप लगाया की उनका दूर-दूर तक विज्ञान से कोई नाता नहीं हैं, हम उस काल के नागरिक हैं जिसमें एजेंडावाहक पत्रकार फ़ैसला सुनाते हैं कि यदि कोई मुख्यमंत्री भगवा धारण करता है तो उसका विज्ञान से कभी कोई नाता नहीं हो सकता. इन्हीं सारे बेबुनियाद दावों के चलते इन पत्रकारों की पत्रकारिता पर प्रश्न उठते हैं.

रवीश के बाद बरखा दत्त ने भी पत्रकारिता का बनाया मजाक

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार टीवी न्यूज़ की एक पत्रकार बरखा दत्त ने भी कोरोना काल में ऐसा अजीबों गरीब कार्य किया. दरअसल वह श्मशान में जाकर बैठ गईं और वहीं से रिपोर्टिंग करने लगी. लेकिन इन सबके बाद भी इन पत्रकारों को ‘सर तन से जुदा’ वाली रैलियों के बजाए हिंदुओं के श्मशान ही क्यों दीखते हैं?

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