ज्ञानवापी

ज्ञानवापी केस में हिंदू पक्ष फैसला आने के बाद मुस्लिम पक्ष के एक वकील ने भाषा की मर्यादा खोते हुए जज को लेकर कहा, ‘सब बिक गए’

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बचपन में लोमड़ी का एक किस्सा तो सुना ही रहा होगा कि वो एक अंगूर के बगीचे में जाती है और अंगूर के बेल से अंगूर तोड़ने की कोशिश करती है। अंगूर का गुच्छा काफी ऊँचाई पर था, जिससे काफी कोशिशें करने के बाद भी जब लोमड़ी अंगूर तक नहीं पहुँच पाई तो ये कहने लगी कि अंगूर खट्टे हैं। ऐसा ही कुछ हाल ज्ञानवापी विवादित ढाँचे पर वाराणसी कोर्ट के फैसले के बाद मुस्लिमों, वामपंथियों और लिबरलों का है। मुस्लिमों के पक्ष में फैसला नहीं आया तो वो अब ये कह रहे हैं कि ‘सब बिक गए हैं।’ देखें यह वीडियो:-

दरअसल, ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के अंदर श्रृंगार गौरी मंदिर में पूजा करने को लेकर अनुमति के मामले में वाराणसी कोर्ट ने हिंदुओं की याचिका को सुनवाई योग्य करार दे दिया था। इसे मुस्लिम हिंदुओं के पज्ञ में मान रहा है। ज्ञानवापी की पैरवी करने वाले अंजुमन इंतजामिया कमेटी के वकील मेराजुद्दीन सिद्दीकी ने कोर्ट के फैसले को एकतरफा करार देते हुए कहा कि वो अब मामले में हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाएँगे।

इतना ही नहीं मुस्लिम पक्ष के वकील की खिसयाहट का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने कह दिया कि सभी बिक गए हैं। केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए सिद्दीकी ने कहा कि न्यायपालिका और संसद आपकी है। आप संसद के नियमों को नहीं मानेंगे तो क्या कह सकते हैं। मेराजुद्दीन ने दावा किया कि जिला जज ने संसद द्वारा पारित कानून को दरकिनार कर दिया है।

उल्लेखनीय है कि वाराणसी जिला कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए  बीते सोमवार को ज्ञानवापी मामले को सुनवाई के योग्य करार दिया था। इसके साथ ही कोर्ट ने 22 सितंबर को मामले में सुनवाई के लिए तारीफ भी तय कर दी थी। इसके बाद से ही इस्लामिक कट्टरपंथी और कथित लिबरल इसकी तुलना एक और बाबरी से कर रहे हैं।

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