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मानवता का अद्भुत उदहारण प्रस्तुत करते हुए इस कोरोना (Corona) के कठिन काल में भी RSS ने 200 से अधिक अस्थियों का विसर्जन किया है.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार विश्व के सबसे बड़े संगठन यानि की राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ RSS ने अब उन लोगों के लिए जन सेवा आरंभ कर दी जिनके अपनों ने ही इस विकट परिस्थिति में उनका साथ छोड़ दिया हो, बता दें की आरएसएस अब उनकी अंत्येष्टि (अंतिम संस्कार) से लेकर अस्थियों के विसर्जन तक की व्यवस्था खुद करने में जुट गया हैं.

देश की हालिया परिस्थितियों को नजरंदाज न करते हुए बताएं तो बहुत से मृत शव ऐसे हैं जिनके अंतिम संस्कार के लिए कोई भी परिजन आगे नहीं आए हैं, या फिर शवों को मुखाग्नि देने वाला कोई नहीं है. इसलिए RSS समूह आगे आया हैं, ताकि इन सभी जनों को मुक्ति की प्राप्ति हो सके. स्वयंसेवक अस्थि संचयन करते हैं फिर चितास्थल की सफाई करते हैं, इस दौरान ट्रक से लकड़ियाँ लाने का प्रबंध भी करते हैं और जिस भी शव का अंतिम संस्कार करने वाला कोई न हो उसका विधिवत रूप से संस्कार भी करते हैं.

बता दें की राष्ट्रीय स्वयंसेवकों ने मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में दो सौ से भी अधिक अस्थियों को होशंगाबाद में पुरे विधिवत रूप से नर्मदा नदी में विसर्जन किया, होशंगाबाद के मंगल घाट पर अस्थियाँ विसर्जित करने की प्रक्रिया पूरी की गई. संघ के स्वयंसेवक ने समूह बनाकर 200 से ज्यादा अस्थियों के साथ भोपाल से नर्मदापुरम निकले और इस दौरान मध्य भारत के प्रांत संघचालक अशोक पाण्डेय ने पुष्पांजलि अर्पित कर नर्मदापुरम के मंगल घाट पर पूजन के बाद इन अस्थियों को नर्मदा में विसर्जित कर दिया.

आरएसएस के स्वयंसेवकों ने कई परिवारों को ऑनलाइन भी जोड़ा और उन्होंने पूरे विधिवत रूप से ऑनलाइन ही सारी रस्में पूरी करी. कोरोना (Corona) काल में मध्य भारत प्रांत के स्वयंसेवकों ने कुल 53 स्थानों पर अंतिम संस्कार के लिए अपनी सेवाएँ दी, आरएसएस के स्वयंसेवकों ने 22 मई यानि शनिवार को 17 लोगों की अस्थियाँ नर्मदा में विसर्जित की हैं.

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