सालासर बालाजी धाम

चुरू में स्थित हैं राम भक्त हनुमान जी का दुर्लभ मंदिर, सालासर बालाजी धाम में बजरंग बली की स्वयंभू प्रतिमा के मुख पर दाड़ी-मूंछ भी दर्शाई गई हैं.

भारत के अलग – अलग राज्यों में राम भक्त हनुमान जी ने कई भव्य मंदिर हैं, ऐसे में राजस्थान क्यों पीछे रहता. राजस्थान के चुरू जिले में स्थित हैं सालासर बालाजी धाम, जहां होती है दाड़ी और मूंछ वाले बजरंग बली की पूजा. इस मंदिर में भी खुद में एक रहस्य छुपाया हुआ है, दरअसल हनुमान जी यहां अपने एक भक्त को दिए वचन को पूरा करने के लिए विराजमान हैं. सालासर बालाजी धाम में स्थापित हनुमान जी की मूर्ति स्वयंभू यानि स्वयं प्रकट होने वाली प्रतिमा हैं.

ऑपइंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक सालासर बालाजी धाम का इतिहास 18वीं शताब्दी के मध्य का है, मोहनदास नाम के संत हनुमान जी के बहुत बड़े भक्त थे. उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर हनुमान जी ने उन्हें वचन दिया कि जल्दी ही वो मूर्ति रूप में प्रकट होंगे, 1754 में नागौर जिले के आसोटा नामक गाँव में एक जाट अपने खेत में हल चला रहा था, तब उसके हल से कोई कठोर पत्थर जैसी वस्तु टकराई. उस जाट किसान ने जब धरती से उस वस्तु को निकाला तो वह कुछ और नहीं बल्कि हनुमान जी की अद्भुत प्रतिमा थी. जिस दिन खेत में हनुमान जी प्रकट हुए, उसी रात उन्होंने आसोटा गाँव के एक ठाकुर को स्वप्न देकर आदेशित किया कि उन्हें सालासर धाम पहुंचाया जाए.

इस दौरान ही श्री बजरंग बली ने भी अपने परम भक्त मोहनदास को भी सूचना दी कि उनकी प्रतिमा बैलगाड़ी में आ रही है, उन्होंने यह भी बताया की यहां पहुंचने के बाद बैलगाड़ी को खुला छोड़ देना और जिस स्थान पर वो रुके वहीं पर मंदिर बनाया जाए. बता दें की हनुमान जी के निर्देशानुसार जहां बैलगाड़ी अपने आप रुकी वहीं पर वर्तमान सालासर धाम का भव्य मंदिर स्थापित हैं. गौरतलब है की किसान जाट के खेत में मूर्ति प्रकट हुई, उस समय उसने अपनी पत्नी के साथ मिलकर हनुमान जी को चूरमा का चढ़ावा चढ़ाया था, तब से लेकर अब तक सालासर बालाजी को चूरमा का प्रसाद चढ़ाया जाता है.

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