सनातन धर्म

जिसका ना तो कोई आरंभ है और ना ही अंत, संसार के सबसे प्राचीन धर्म वास्तव में सनातन धर्म है. इसे वर्तमान में हिंदू-धर्म के नाम से जाना जाता है.

सनातन धर्म की यदि व्याख्या करना चाहें तो सालों साल भी कम पड़ जाएंगें, क्योंकि यह स्वयं ईश्वर है. ईश्वर धर्म ही सनातन धर्म है. इसमें मनुष्य के जन्म से लेकर मोक्ष तक के सारे द्वारों का उल्लेख हैं. इसमें चार वेद अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं, इन्हीं चार वेदों के कारण इसे वैदिक धर्म के नाम से भी पहचाना जाता है. समय के साथ – साथ परिस्थितियां भी बदल गई और इसे हिंदू धर्म के नाम से पहचान मिली. लेकिन कोई भी मनुष्य जो सत्य और न्याय का अनुसरण करता है व मानवाधिकारों का उलंघन ना करते हुए ईश्वर द्वारा निर्मित इस प्रकति का सम्मान करता है, वही सनातन धर्म है.

सनातन धर्म में चार वेदों (ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्वेद) का वर्णन मिलता है, जिनमें से ऋग्वेद में कहा गया है की ‘यह पथ सनातन है. समस्त देवता और मनुष्य इसी मार्ग से पैदा हुए हैं तथा प्रगति की है. हे मनुष्यों आप अपने उत्पन्न होने की आधाररूपा अपनी माता को विनष्ट न करें’. सनातनधर्म में वेदों के अलावा चार वर्णों (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शुद्र) का भी बहुत महत्व है, इन चारों वर्णों को मनुष्य के क्रम के आधार पर सृष्टि को संतुलित करने के लिए विभाजित किया गया था.

विक्की पीडिया की जानकारियों के मुताबिक विज्ञान जब प्रत्येक वस्तु, विचार और तत्व का मूल्यांकन करता है तो इस प्रक्रिया में धर्म के अनेक विश्वास और सिद्धांत धराशायी हो जाते हैं. विज्ञान भी सनातन सत्य को पकड़ने में अभी तक कामयाब नहीं हुआ है किंतु वेदांत में उल्लेखित जिस सनातन सत्य की महिमा का वर्णन किया गया है विज्ञान धीरे-धीरे उससे सहमत होता नजर आ रहा है. हमारे ऋषि-मुनियों ने ध्यान और मोक्ष की गहरी अवस्था में ब्रह्म, ब्रह्मांड और आत्मा के रहस्य को जानकर उसे स्पष्ट तौर पर व्यक्त किया था. वेदों में ही सर्वप्रथम ब्रह्म और ब्रह्मांड के रहस्य पर से पर्दा हटाकर ‘मोक्ष’ की धारणा को प्रतिपादित कर उसके महत्व को समझाया गया था. मोक्ष के बगैर आत्मा की कोई गति नहीं इसीलिए ऋषियों ने मोक्ष के मार्ग को ही सनातन मार्ग माना है.

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संसार की सबसे प्रथम लिखित पुस्तक हैं: वेद

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