कबीरचौरा महोत्सव

बीते सोमवार को देशभर से वाराणसी पहुंचे महाकवि संत कबीर के मानने वाले, कबीर पंथियों ने पदयात्रा के साथ ही तीन दिवसीय कबीर निर्वाण महोत्सव का शुभारंभ किया.

कबीरचौरा महोत्सव

आपको बता दें की वाराणसी को महाकवि अथवा संत कबीर की जन्मस्थली भी माना जाता है. इसी कारण सोमवार को वाराणसी में ही कबीरचौरा स्थित मूलगादी से महंत श्री विवेकदास ने कबीर पदयात्रा की विधिवत शुरूआत की है.

वाराणसी के पिपलानी कटरा से कबीर जी की प्रतिमा पर माला चढाने के पश्चात् ही भारत भर के महान संतों की टोली भजन – कीर्तन करते हुए लहरतारा की तरफ़ चल दिए. इस रैली में एक रथ और रथ पर स्थापित श्री कबीर चित्र पर सभी ने पुरे रस्ते पुष्पों की वर्षा भी की, लहरतारा स्थित प्राकट्य स्थल पर पहुंचने के पश्चात् रैली को विश्राम दिया गया.

कबीरचौरा महोत्सव का महत्व

कबीरचौरा महोत्सव पूर्व काल से ही कबीरमठ के आसपास रहने वाले सभी प्रसिद्ध कलाकारों के सम्मान हेतु आयोजित किया जाता आए है. प्रसिद्ध विशेषज्ञों का कहना है की इस महोत्सव में महान संत कबीर साहब और कला की तीनों विधा का मिलन होता है.

इसी महीने की 23 तारिक को कबीरचौरा महोत्सव का उद्घाटन होगा और इसके अतिरिक्त कई बड़े और दिग्गज कलाकार भी इस महोत्सव में अपनी कला का प्रदर्शन करने वाले हैं. इस प्रसिद्ध कलाकारों में पद्मश्री सितारा देवी की पुत्री जयंती माला, चंदूलाल कबीर, सुखदेव मिश्र जी, रेवती सावलकर और प्रशस्ति तिवारी जैसों का नाम भी शामिल है.

कबीर प्राकट्य स्थल पर सत्संग का आयोजन

वाराणसी में जहां एक ओर कबीरचौरा महोत्सव का आनंद लिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कबीर प्राकट्य स्थल पर सत्संग का आयोजन किया जाएगा. स्थानीय महंत विवेक दास जी ने मीडिया को बताया की “कबीर प्राकट्य स्थल हमारे लिए तीर्थ समान है”.

बता दें की कबीर जी ने अपने अंतिम समय में काशी को छोड़ मगहर को चुना था, क्योंकि वे चाहते थे की लोग ये समझ जाएं की मुक्ति के लिए स्थान को नहीं अपितु कर्मों की पवित्रता व भक्ति का भाव अधिक महत्वपूर्ण हैं.

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