अबू धाबी

भारत से मीलों दूर स्थित एक इस्लामिक देश यूएई की राजधानी अबू धाबी में एक भव्य हिंदू मंदिर का निर्माण हो रहा है, इसकी पहली झलक भी सामने आई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ‘शांति, सहिष्णुता व सद्भाव का प्रतीक’ यूएई की राजधानी अबू धाबी में बन रहा पहला हिंदू मंदिर। ये बात भारत के विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने कही है। विदेश मंत्री बुधवार (31 अगस्त 2022) को यूएई के तीन दिवसीय दौरे पर गए हैं। 55,000 वर्गमीटर के दायरे में बन रहे इस मंदिर को पूरी तरह से भारतीय कारीगरों द्वारा बनाया जा रहा है।

विदेश मंत्री एस जयशंकर मंदिर का निर्माण कर रहे भारतीयों की प्रशंसा भी की। अपनी इस यात्रा के दौरान डॉ एस जयशंकर संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद के साथ बातचीत करेंगे और दोनों देशों के बीच व्यापारिक और रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा करेंगे। इस मंदिर की आधारशिला साल 2019 में रखी गई थी।

वहीं विदेश मंत्री एस जयशंकर मंदिर निर्माण की पहली झलक को पहले ट्विटर हैंडल से शेयर भी की। उन्होंने कुछ अद्भुत तस्वीरों को शेयर करते हुए लिखा, “गणेश चतुर्थी के शुभ अवसर पर अबू धाबी में निर्माणाधीन BAPS हिंदू मंदिर में दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। मंदिर निर्माण की तीव्र प्रगति तथा इसमें शामिल सभी लोगों की सराहना करता हूँ।साइट पर BAPS टीम, समुदाय के सदस्यों, श्रद्धालुओं और कार्यकर्ताओं से मिलकर अति प्रसन्नता हुई।”

उल्लेखनीय है कि संयुक्त अरब अमीरात में भारतीय समुदाय की कुल संख्या 30 फीसदी के करीब है, जो कि खाड़ी देशों में सबसे बड़ा प्रवासी समुदाय है। इस मंदिर का नाम बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण (BAPS) मंदिर है। यह मंदिर अमेरिका के न्यू जर्सी में स्थित अक्षरधाम मंदिर के बराबर है। इसके बनने की शुरुआत कुछ यूँ हुई कि साल 2015 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूएई के दौरे पर गए थे।

उसी दौरान वहाँ की सरकार ने एक हिंदू मंदिर के निर्माण के लिए जमीन मुहैया कराई, ताकि हिंदू समुदाय भी अपनी आस्था के अनुसार मंदिर जा सके। दोनों देशों के बीच बढ़ती दोस्ती को दर्शाने के लिए अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख मुहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने ये जमीन गिफ्ट के तौर पर दी थी। बाद में 11 फरवरी 2018 में पीएम मोदी ने यूएई के अपने दौरे के दौरान मंदिर की निर्माण का शिलान्यास और पूजन भी किया।

गौरतलब है कि ये मंदिर अबू धाबी और दुबई के बीच अल रहाबा जिले में निर्माधीन है। बनने के बाद इस मंदिर में स्वामीनारायण, अक्षर पुरुषोत्तम महाराज, शिव, कृष्ण, राम, जगन्नाथ, वेंकटेश और अयप्पन भगवान की मूर्तियाँ स्थापित की जाएँगी। इसके निर्माण में राजस्थान के गुलाबी पत्थर और यूरोप से आयातित मार्बल का उपयोग किया जा रहा है।

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