अमर शहीद भगत सिंह के साथ अंग्रेजों की संसद में बम फेंकने वाले शहीद बटुकेश्वर दत्त की बंगाल में वो सम्मान नहीं मिल रहा है जिसका वे हकदार है.

बटुकेश्वर दत्त

आपको बता दें की पश्चिम बंगाल में चुनावी गर्मा गर्मी के बिच एक चोंका देने वाली तस्वीर निकलकर सामने आई हैं, ये तस्वीर ओर किसी की नहीं बल्कि अमर शहीद बटुकेश्वर दत्त की है. बटुकेश्वर दत्त वे व्यक्ति हैं जिन्होंने अंग्रेजों की संसद में शहीद भगत सिंह के साथ बम फेंका था.

अमर शहीद बटुकेश्वर दत्त

भारत देश की आजादी के महान क्रांतिकारी बटुकेश्वर दत्त का जन्म 18 नवंबर 1910 को वर्धमान जिले के औरी गांव में हुआ. बटुकेश्वर दत्त ने महज 19 वर्ष की अल्प आयु में ही 8 अप्रैल 1929 को अमर शहीद भगत सिंह के साथ मिलकर अंग्रेजों की संसद पर बम फेंका था. इस घटना के बाद देश की आजादी की जंग ने नया मोड़ ले लिया था.

भगत सिंह को तो फांसी की सजा हो गई थी, लेकिन शहीद बटुकेश्वर दत्त को भी कड़ी सजा दी गई थी. इनको उस समय ‘काला पानी की सज़ा’ सुनाई गई थी, इसके अंतर्गत शहीद बटुकेश्वर दत्त को अंडमान द्वीप पर बनाई गई सेल्युलर जेल में उम्र भर के लिए बंद कर दिया गया था. सन 1947 के बाद देश आजाद होते ही ये वहां से निकल गए थे.

अब बंगाल में बटुकेश्वर दत्त की ये दुर्दशा

जैल से निकलने के बाद शहीद का जीवन बहुत मुश्किलों में बिता. जीवन के अंतिम क्षणों में उन्हें टीबी जैसी भयानक जानलेवा बीमारी हो गई और इसी के कारण 20 जुलाई 1965 को उनके तत्कालीन निवास स्थान पटना में ही मृत्यु हो गई, वहां आज भी उनकी बेटी रहती हैं.

यदि पश्चिम बंगाल में शहीद बटुकेश्वर दत्त की दुर्दशा की बात करें तो प्रसाशन की लापरवाहियों के कारण वर्धमान जिले के औरी गांव में शहीदों के निशां धूल में दबे हुए हैं, यहां मेला तो दूर दूर तक नहीं हैं, लेकिन इस विरासत के प्रति सरकार और प्रशासन की उपेक्षा जरूर देखने को मिलती हैं.

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