शिव चमत्कार

साल 2013 में आई एक प्राक्रतिक आपदा ने पुरे भारत को हिला कर रख दिया, किन्तु केदारनाथ धाम की जड़ें ना हिला पाई. इसे शिव चमत्कार माना जाता है.

16 जून 2013 को उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के बड़े में भयंकर प्रलयंकारी बाढ़ आई, जिसने पुरे राज्य सहित दिल्ली, हरियाणा और उत्तरप्रदेश के इलाकों को भी प्रभावित किया. मगर इस बाढ़ में ऐसा शिव चमत्कार देखने को मिला जिसके बाद भगवान को मित्थ्या मानने वालों के तो शायद होश ही उड़ गए, क्योंकि पूरा क्षेत्र और परिसर बाढ़ में बह गया लेकिन केदारनाथ धाम टस से मस तक नहीं हुआ. यह दिव्य और चमत्कारिक मंदिर भगवान शिव को समर्पित हैं.

महाकालेश्वर शिव को समर्पित यह मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों, चार धामों और पंच केदार में से एक भी हैं हिंदुओं का समसे पवित्र धार्मिक स्थलों में से भी एक हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बताया जाता है की इस आपदा के दौरान एक बड़े पत्थर की शिला इस मंदिर के थोड़ी सी पीछे आ गई थीं और उसने बाढ़ के पानी के तेज बहाव को दो दिशा में बदल दिया. अब भी वह शिला उसी स्थान पर है और उसे भीमशिला का नाम दिया गया है. कुछ लोग तो इस शिला को स्वयं महादेव का प्रतीक भी मानते हैं. इतने तेज बहाव को झेलने वाली शिला आखिर उसी तेज बहाव में बहती हुई वहां पहुंची कैसे? और मंदिर के थोड़ी सी पीछे आकर रुकी क्यों? इसका जवाब भी आज तक नहीं मिला.

आंकड़ों के मुताबिक उस आपदा में लगभग 5000 से ज्यादा लोगों की जानें गई और इससे भी ज्यादा लोग बेघर हो गए, इस आपदा में 11 हजार से ज्यादा मवेशी पानी में बह गए थे. बता दें की चौराबाड़ी में बनी झील उस दिन करीब 24 घण्टे हुई लगातार बारिश के बाद टूट गई थी. झील का पानी पहाड़ से नीचे आया जिसने मंदाकिनी के साथ मिलकर जबरदस्त तबाही मचाई थी.

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