श्री ग्यारह रुद्री मंदिर

महाभारत के भयानक युद्ध की समाप्ति के बाद मृत करोड़ों सैनिकों की आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए श्री कृष्ण ने श्री ग्यारह रुद्री मंदिर स्थापित किया.

आज कुछ लोग बॉलीवुड की फ़िल्में देखकर भगवान के अस्तित्व पर प्रश्न उठाने लग गए हैं, लेकिन वे कभी खुद इस चीज की रिसर्च नहीं करते की वास्तव में भगवान का अस्तिव इस संसार में है या नहीं. आज आप ऐसे ही प्रमाण से साक्षात्कार करने वाले हैं. हरियाणा के कैथल में स्थित श्री ग्यारह रुद्री मंदिर उन्हीं अनेकों प्रमाणित साक्षात्कारों में से एक हैं. क्योंकि इस मंदिर का निर्माण भगवान श्री कृष्ण ने 11 रूद्र स्थापित कर करवाया था.

ऑपइंडिया की विशेष रिपोर्ट के मुताबिक भगवान श्री कृष्ण ने इसी स्थान पर महाभारत के भीषण युद्ध में वीरगति प्राप्त करने वाले करोड़ों सैनिकों की आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए 11 रूद्रों को स्थापित शिवालय का निर्माण किया. इसी कारण इस मंदिर की श्री ग्यारह रुद्री मंदिर कहा जाता है. इसके अलावा भगवान कृष्ण ने पांडवों को अपने स्वजनों की हत्या के पाप से मुक्त करने के लिए श्री कृष्ण ने इस मंदिर में उनसे भी पूजा-अर्चना करवाई. इसके अलावा श्रीकृष्ण के द्वारा नौ कुंड भी स्थापित किए गए थे, हालाँकि मंदिर का लगातार पुनर्निर्माण होता रहा लेकिन श्री कृष्ण द्वारा बनवाया गया प्राचीन मंदिर और उसमें स्थापित किए गए 11 रुद्र आज भी उसी तरह हैं.

बताया जाता है की 11 रूद्रों की उत्पत्ति काशी में हुई थी. ऋषि कश्यप के वरदान मांगने पर भगवान शिव ने 11 रूद्रों के रूप में सुरभि गाय के पेट से जन्म लिया था. काशी में 11 रूद्रों की उत्पत्ति के बाद श्रीकृष्ण ने कैथल में इन 11 रूद्रों को विराजमान किया था, इसलिए कैथल को ‘छोटी काशी’ भी कहा जाता है. इन 11 रुद्रों को विलोहित, शास्ता, कपाली, पिंगल, अजपाद, अहिबरुध्न्य, भीम, विरूपाक्ष, चंड, भव व शंभु के नाम से जाने जाते हैं.

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