श्री चामुंडेश्वरी मंदिर

मैसूर मूल नगर से केवल 12 किलोमीटर की दुरी पर स्थित श्री चामुंडेश्वरी मंदिर भगवान शिव की शक्ति यानि की माता पार्वती को समर्पित हैं.

भारत का इतिहास सनातन संस्कृति से जुड़ा हुआ है. युगों पुरानी घटनाओं के प्रमाण आज भी सुरक्षित सबको देखने को मिलते हैं. जिनमें से एक हैं श्री चामुंडेश्वरी मंदिर. बताया जाता है की यह दिव्य मंदिर 1000 वर्षों से भी अधिक पुराना है. श्री चामुंडेश्वरी मंदिर में मां दुर्गा के चामुंडा स्वरूप की पूजा की जाती है. माता पार्वती ने भी भगवान शिव और भगवान विष्णु के भांति समय समय पर अलग अलग रूप लेकर इस धरती को पापियों से मुक्ति दी हैं.

ऑपइंडिया की विशेष रिपोर्ट के मुताबिक देवी माहात्म्य में जिन माता चामुंडा का प्रमुख रूप से वर्णन किया गया है, वही इस सदियों पुराने मंदिर की मुख्य देवी हैं. देवी पुराण और स्कन्द पुराण में इस दिव्य क्षेत्र का वर्णन किया गया है. पुराणों के अनुसार जब महिषासुर ने ब्रह्माजी की तपस्या से वरदान हासिल कर लिया तो वह देवताओं पर ही अत्याचार करने लगा था. बता दें की ब्रह्माजी ने महिषासुर को वरदान दिया था कि उसका वध एक स्त्री के माध्यम से ही होगा.

वरदान की जानकारी मिलने के बाद सभी देवताओं ने माता दुर्गा यानि की पार्वती जी से अपने रक्षण की विनती करी और कहा की कृपा इस समस्या का कोई समाधान करें. इसके बाद श्रृष्टि के कल्याण हेतु माता दुर्गा ने चामुंडा माता के स्वरूप में पृथ्वी पर अवतरित हुई और इस स्थान पर असुरराज महिसासुर से भयंकर युद्ध किया, जिसमें माता ने उसका वध कर दिया. बता दें की वर्तमान में यह पवित्र स्थान कर्नाटक राज्य के मैसूर जिले में है. गौरतलब है की मंदिर में प्रवेश से पहले इसी राक्षस की विशाल मूर्ति भी लगी हुई हैं.

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