श्री कृष्ण मंदिर

द्वारिका और मथुरा के अलावा भगवान श्री माधव के गुजरात में एक ऐसे स्थान स्थान पर श्री कृष्ण मंदिर हैं, जहां प्रभु ने अपने इस जीवन का अंत किया.

गुजरात के सोमनाथ जिले में सौराष्ट्र के प्रभास क्षेत्र में स्थित भगवान श्री कृष्ण का यह मंदिर ‘भालका तीर्थ’ के नाम से प्रसिद्ध है, माना जाता है की इसी स्थान पर कृष्ण जी ने अपने मानव स्वरूप का त्याग किया था. बता दें की जिस पीपल के पेड़ के नीचे विश्राम के दौरान यह घटना घटी वह पेड़ आज भी ज्यों का त्यों टिका हुआ है. इस श्री कृष्ण मंदिर में द्वारिकाधीश की एक मूर्ति विराजित हैं, जिसमें वे मुस्कुरा रहे हैं और उनके चरणों में वह बहेलिया भी बैठा हुआ है जिसके तीर से द्वारिकाधीश को घाव लगा.

ऑपइंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार सोमनाथ मंदिर से केवल 5 किलोमीटर की दुरी पर स्थित इस स्थान श्री कृष्ण अपने जीवन के अंतिम क्षणों के दौरान विश्राम कर रहे थे. इस दौरान उनके बाएँ पैर के तलवे में बना पदम का चिन्ह अत्यंत ही चमक रहा था, दूर से देखने पर यह एक हिरन की आंख जैसा प्रतीत हुआ. जिससे भ्रमित होकर किसी हिरन का शिकार करने आए आदिवासी जरा नामक बहेलिया ने उस पदक का निशाना साधा और तीर ठीक निशाने पर लगा.

भगवान श्री कृष्ण के तीर लगने के बाद उनके चरण में से रक्त का बहाव शुरू हो गया, ये देख जरा भागकर श्री कृष्ण शरण में आ गया और उनसे क्षमा की मांग करने गया. उसे समझाते हुए श्री कृष्ण जी ने उन्हें बताया की यही नियति है, अब मेरे इस धरती से प्रस्थान करने का समय आ गया है और वह इसका मात्र एक कारण ही है. जिसके बाद द्वारिकाधीश पास में ही हिरण नदी के किनारे पहुंचे और वहीं पर उन्होंने अपनी मानव देह का त्याग कर दिया.

विक्की पीडिया की जानकारी के मुताबिक सोमनाथ मंदिर से 5 किलोमीटर दूर स्थित इस तीर्थस्थान के बारे में मान्यता है कि यहाँ पर विश्राम करते समय ही भगवान श्री कृष्ण को जर नामक शिकारी ने गलती से तीर मारा था, जिसके पश्चात् उन्होनें पृथ्वी पर अपनी लीला समाप्त करते हुए निजधाम प्रस्थान किया. बता दें की श्री सोमनाथ ट्रस्ट द्वारा प्रबंधित इस स्थान को एक भव्य तीर्थ एवं पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना पर कार्य चल रहा है.

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