श्री नागचन्द्रेश्ववर मंदिर

उज्जैन महाकाल मंदिर के गर्भ गृह के ऊपर स्थापित श्री नागचन्द्रेश्ववर मंदिर को साल में केवल एक बार वो भी नागपंचमी के दिन ही इसके पट खोले जाते हैं.

भारत में अनेकों त्यौहार, उत्सव और पर्व मनाए जाते हैं, जिस प्रकार दिवाली, होली और महाशिवरात्रि जैसे पर्वों को लेकर भक्त उत्साहित रहते हैं उसी प्रकार नागपंचमी पर भारत के कई हिस्सों में लोग इसे धूमधाम से मनाते हैं. ऐसा ही एक स्थान प्राचीन धार्मिक नगरी उज्जैन. उज्जैन के महाकाल मंदिर के गर्भगृह के ऊपर ओंकारेश्वर मंदिर और उसके भी शीर्ष पर श्री नागचन्द्रेश्ववर मंदिर. भक्तों के लिए इस मंदिर के कपाट को केवल पुरे वर्ष में एक दिन यानि की 24 घंटों के लिए खोले जाते हैं.

नवभारत की एक विशेष रिपोर्ट के मुताबिक इस बार की नाग पंचमी के दिन इसके पट को खोला गया था. बता दें की गुरुवार 12 अगस्त की रात्रि 12 बजे पट खुलने के बाद विधि विधान से पूजा अर्चना की गई. श्रीमहाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा 13 अगस्त को श्री महाकालेश्वर भगवान की सायं आरती के पश्चात श्री नागचन्द्रेश्वर भगवान की पूजन आरती श्री महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी एवं पुरोहितों द्वारा की गई. इस के बाद रात्रि के 12 बजे कपाटों को बंद कर दिए गए.

गौरतलब है की 11 वीं शताब्दी की एक प्रतिमा श्री नागचन्द्रेश्ववर मंदिर में स्थापित हैं, इस दिव्य प्रतिमा में अपने 7 फनों के साथ स्वयं श्री नागचन्द्रेश्ववर भगवान सुशोभित हैं. भगवन नागचन्द्रेश्ववर के फनों की छांव में माता पार्वती और भगवान शिव जी हैं. इनके अलावा शिव और पार्वती के दोनों वाहन यानि की नंदी और सिंह भी विराजित हैं. मूर्ति में श्री गणेशजी की ललितासन मूर्ति उमा के दांयी ओर श्री कार्तिकेय की मूर्ति व ऊपर की ओर सूर्य-चंद्रमा भी अंकित हैं.

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