तारा तारिणी मंदिर

ब्रह्मपुर शहर में स्थित है तारा तारिणी मंदिर देवी आदि शक्ति को समर्पित हैं, सुदर्शन चक्र से कटने के बाद माता सती के दोनों स्तन इसी स्थान पर गिरे थे.

भारत और उसके आस-पास के कुछ क्षेत्रों में 51 अथवा 52 शक्ति पीठ स्थापित हैं, जो की सनातन सत्यता के युगों पुराने प्रत्यक्ष का प्रमाण वर्तमान में भी सबके सामने साक्षात् रखते हैं. तारा तारिणी मंदिर ओडिशा राज्य के गंजम जिले के ब्रह्मपुर शहर में स्थित है. पोरौणिक मान्यताओं के अनुसार यह वही स्थान हैं जहां पर भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र के प्रहार से माता सती के कटे दोनों स्तन आ गिरे थे. ये मंदिर माता के प्रमुख 4 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है.

ऑपइंडिया की विशेष रिपोर्ट के मुताबिक शिव पुराण, देवी भागवत पुराण, कालिका पुराण, अष्टशक्ति और पीठनिर्णय तंत्र में तारा तारिणी समेत 4 आदि शक्तिपीठों का वर्णन किया गया है. महाराज दक्ष के द्वारा अपमान किए जाने के बाद जब माता सती ने अपने प्राण त्याग दिए तो भगवान शिव उनकी मृत देह को लेकर भयंकर क्रोध में आ गए. उनके क्रोध को शांत करने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती की मृत देह को कई भागों में विभक्त कर दिया. इस दौरान माता सती के दोनों स्तन इसी स्थान पर गिरे थे, इस कारण इस मंदिर स्थली को ‘स्तन पीठ’ भी कहा जाता है.

तारा तारिणी मंदिर कुमारी पहाड़ी के ऊपर स्थित हैं और इस मंदिर के निर्माण में पूरी तरह केवल पत्थरों का ही प्रयोग किया गया हैं, बताया जाता है की मंदिर का निर्माण कलिंग राजाओं द्वारा प्राचीन काल में करवा दिया था. गौरतलब है की मंदिर जिस पहाड़ी पर स्थित है, उसकी ऊंचाई 708 फुट है, जहां यह आदि शक्तिपीठ क्षेत्र लगभग 180 एकड़ जमीन पर फैला हुआ है, कुमारी पहाड़ी की चोटी तक पहुंचने के लिए 999 सीढ़ियों की चढ़ाई है मगर इसके अलावा एक पक्की रोड भी पहाड़ी की चोटी पर स्थित मंदिर तक जाती है.

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