राष्ट्रपति

आज भारत को द्रोपदी मुर्मू के नाम से 15वां राष्ट्रपति मिला चुका है, उन्होंने विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को चारों खाने चित्त कर जीत दर्ज की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राष्‍ट्रपति चुनाव के लिए संसद भवन में जारी मतगणना पूरी हो गई है। 15 मत अवैध घोषित कर दिए गए। राज्‍यसभा के महासचिव ने मीडिया के सामने आकर बताया कि टोटल 748 वैलिड वोट गिने गए। इनका कुल मूल्‍य 5,23,600 है। इनमें से द्रौपदी मुर्मू को 540 यानी 3,78,000 वोट मिले हैं जबकि यशवंत सिन्‍हा को 208 यानी 1,45,600 वोट।

आपको बताते चलें की 20 जून, 1958 को उड़ीसा में एक साधारण संथाल आदिवासी परिवार (Santhal Tribal Family) में जन्मी मुर्मू ने 1997 में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। यह 1997 में रायरंगपुर में जिला बोर्ड की पार्षद भी चुनी गईं थी। लेकिन एक आदिवासी से राष्ट्रपति तक का सफर उनका आसान नहीं था, बल्कि कठिन संघर्षों से भरा हुआ रहा।

बताया जा रहा है की 2009 से 2015 के बीच महज छह साल में मुर्मू ने अपने पति, दो बेटों, मां और भाई को खो दिया। इनके तीन बच्चे थे, दो बेटे और एक बेटी। मुर्मू के एक बेटे की 2009 में और दूसरे बेटे की तीन साल बाद सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। इससे पहले, उन्होंने कार्डियक अरेस्ट के कारण अपने पति श्याम चरण मुर्मू को भी खो दिया था। उनकी बेटी इतिश्री फिलहाल में उड़ीसा के एक बैंक में काम करती हैं।

जानकारी यह भी सामने आई है की इन्होंने अपनी शिक्षा की सीढ़ी गृह जनपद से शुरू की। इसे पूरा करने के बाद मुर्मू ने रामदेवी महिला यूनिवर्सिटी से अपनी ग्रेजुएशन डिग्री प्राप्त की। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पढ़ाई करने के बाद अपना करियर बतौर शिक्षक के रूप में चुना और कुछ सालों तक टीचर की नौकरी की।

गौरतलब है की शुरुआती दौर में मुर्मू ने अपनी राजनीतिक करियर की शुरुआत भाजपा पार्टी (BJP) के साथ की थी। उड़ीसा में भाजपा से जुड़ने के बाद इन्होंने 1997 में भारी जीत के साथ रायरंगपुर पंचायत से पार्षद का पद संभाला था। इसके बाद भाजपा ने द्रौपदी के जोश को देखते हुए इन्हें अनुसूचित जनजाति मोर्चा का वाईस प्रेजिडेंट बना दिया।

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