मोरक्को

फिफा विश्व कप 2022 के दूसरे सेमी फाइनल में फ्रांस से मोरक्को को हार का सामना करना पड़ा, उसके बाद कट्टरपंथियों ने वो कांड किया, जिसे देखकर ज्यादा हैरानी नहीं हुई।

ऑपइंडिया की एक खास रिपोर्ट के अनुसार हार में हिं’सा, जीत में आ’तंक, खुशी में ब’म फोड़ना, गम में जान से मा’रना… हर मानवीय संवेदना में कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़ का ये अजीब सा व्यवहार एकसमान रहता है– 72 हूरों की याद में, काफिरों के विरोध में! फुटबॉल वर्ल्ड कप में इस्लामी देश मोरक्को की जीत या हार इसका एक ताजा उदाहरण है। ये वीडियो भी देखिए, जिसमें आपको सब स्पष्ट हो जाएगा:-

आपको बताते चलें कि फ्रांस के कई सारे शहरों में दंगे हो रहे हैं। वहीं बेल्जियम में भी पत्थरबाजी चालू कर आतंक कायम किया जा रहा है। नीदरलैंड में सड़कों पर खौफ का माहौल बना हुआ है, शांति के लिए दंगा-रोधी स्पेशल पुलिस को उतारा गया है। यह सब इसलिए क्योंकि इस्लामी देश मोरक्को फुटबॉल वर्ल्ड कप 2022 के सेमीफाइनल में फ्रांस से हार गया। ये हार 2-0 के अंतराल की रही।

कट्टरपंथी मुस्लिम हैं तो क्या हुआ, इंसान तो हैं ही – यह तर्क दिया जा सकता है, वाजिब भी है। अपनी पसंदीदा टीम की हार पर गुस्सा आना इंसानी फितरत है। गुस्से में लड़कों से गलतियाँ हो जाती हैं, यह तर्क भी गढ़ सकते हैं। इसमें 14 साल का एक बच्चा मर भी गया तो क्या? 72 हूरों की याद में सब जायज है! आखिर फ्रांस में ही रहने वाले फ्रांसीसी नागरिक की इतनी औकात कैसे हो गई कि वो अपने ही पैसे से खरीदी कार पर फ्रांस का झंडा लगा सके? इस्लामी मुल्क हारा है तो हर झंडा गम में झुका होना चाहिए – इस ‘फतवे’ को शायद वो कार ड्राइवर समझ नहीं पाया।

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