साउथ

साउथ सिनेमा के सुपरस्टार अभिनेता विक्रम ने भारत के प्राचीन इतिहास और सांस्कृतिक गौरव को लेकर बात की है, जिसका वीडियो भी सामने आया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बॉलीवुड को छोड़ दें तो दक्षिण भारतीय सिनेमा सदा से भारतीय संस्कृति को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए काम करता रहा है। इसी क्रम में साउथ फिल्म इंडस्ट्री के स्टार एक्टर विक्रम ने भारतीय संस्कृति और उसकी समृद्ध प्राचीन विरासत के गौरव को सामने रखा है। एक्टर ने इस बात पर अफसोस भी जताया कि मिश्र के पिरामिडों की बात सभी करते हैं, लेकिन एक मंदिर के शिखर पर 80 टन का पत्थर कैसे पहुँचा, इस पर कोई बात नहीं करता।

दक्षिण भारत में शासन करने वाले महान चोल साम्राज्य पर फोकस करके उनकी फिल्म आ रही है PS-1। इसी को लेकर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें बोलते हुए एक्टर ने भारत के समृद्ध इतिहास पर प्रकाश डाला। विक्रम के मुताबिक, हर व्यक्ति की अपनी-अपनी च्वाइस होती है किसी को विज्ञान, भूगोल और ज्योतिष रुचि मिलती है। लेकिन उन्हें इतिहास सबसे अधिक इंट्रेस्टिंग विषय लगता है।

एक्टर विक्रम ने भारत की समृद्ध विरासतों को लेकर उदासीनता के मुद्दे पर कहा,  “तंजावुर के मंदिर का गोपुरम सबसे ऊँचा है। ये चोल साम्राज्य का सांस्कृतिक गढ़ है और राजराज चोल ने इसे बनवाया था। इसके सबसे ऊपर जो पत्थर लगा हुआ है, उस एक पत्थर का वजन 80 टन है। इसके बारे में कोई बात नहीं करता कि ये कैसे बना, लेकिन सब पिरामिडों की बात करते हैं। हम गिरती हुई इमारतों की प्रशंसा करते हैं, लेकिन उन मंदिरों पर बात नहीं करते जिन्होंने प्लास्टर के बिना ही निर्माण कर लिया।”

उन्होंने हिंदी की किताबों में चंदा मामा के पाठ के बारे में बताते हुए स्पष्ट किया कि तमिल में भी ऐसी कई कहानियाँ हैं। विक्रम बताते हैं कि प्राचीन भारत में हाथियों, बैलों और इंसानों ने मिलकर 6 किमी लंबे रैंप का निर्माण किया। एक्टर ने दावा किया कि ये कंस्ट्रक्शन 6 भूकंपों को भी बर्दाश्त कर सकता है। उन्होंने बताया कि उस ज़माने में 5000 से अधिक बाँध बनवाए और उनके मंत्रिमंडल में जल प्रबंधन को लेकर एक अलग मंत्री था।

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