तिरुपति बालाजी मंदिर

चित्तूर जिले में स्थित तिरुपति बालाजी मंदिर भगवान वेंकटेश्वर के नाम से भी जाना जाता है और यह दिव्य मंदिर श्री हरी भगवान विष्णु को समर्पित है.

भारत में आंध्रप्रदेश के एक समुद्र तट पर बसे चित्तूर जिले में स्थित तिरुपति बालाजी मंदिर अपने आप में ही अद्वितीय हैं और भारत के सबसे प्रसिद्ध हिंदू तीर्थ स्थलों में से एक माना गया है. भगवान विष्णु को समर्पित यह मंदिर समुद्र तल से तकरीबन 3200 फीट ऊंचाई पर स्थित तिरुमला की पहाड़ियों पर बना हुआ है और यही इस मंदिर के आकर्षण की सबसे बड़ी वजह भी मानी जाती हैं. बता दें की यह मंदिर भगवान वेंकटेश्वर के नाम से भी प्रसिद्ध हैं.

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विक्की पीडिया की जानकारी के अनुसार इस मंदिर में विराजित भगवान वैंकटेश्वर के लिए प्रतिदिन लगभग 1 लाख से भी अधिक श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और उनके दर्शन के लिए लंबी कतार लगती हैं, यही कतार इस मंदिर की दिव्यता और प्रसिद्धि का प्रमाण देती हैं. बता दें की पौरोणिक मान्यताओं के मुताबिक बहुत समय पूर्व प्रभु विष्णु ने कुछ समय के लिए स्वामी पुष्करणी नामक सरोवर के किनारे निवास किया था, यह सरोवर तिरुमाला के पास स्थित है. तिरुमाला- तिरुपति के चारों ओर स्थित पहाड़ियाँ, शेषनाग के सात फनों के आधार पर बनीं ‘सप्तगिरी’ कहलाती हैं.

श्री वेंकटेश्वरैया का यह मंदिर सप्तगिरि की सातवीं पहाड़ी पर स्थित है, जो वेंकटाद्री नाम से प्रसिद्ध है. एक अन्य मान्यता में माना गया है की 11वीं शताब्दी में संत रामानुज ने तिरुपति की इस सातवीं पहाड़ी पर चढ़ कर गये थे. प्रभु श्रीनिवास यानि की भगवान वेंकटेश्वर बालाजी उनके समक्ष प्रकट हुए और उन्हें आशीर्वाद दिया. ऐसा माना जाता है कि प्रभु का आशीर्वाद प्राप्त करने के पश्चात वे 120 वर्ष की आयु तक जीवित रहे और जगह-जगह घूमकर वेंकटेश्वर भगवान की ख्याति फैलाई. बता दें की वैकुंठ एकादशी के अवसर पर लोग यहां पर प्रभु के दर्शन के लिए आते हैं, जहां पर आने के पश्चात उनके सभी पाप धुल जाते हैं. मान्यता है कि यहाँ आने के पश्चात व्यक्ति को जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्ति मिल जाती है.

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