माँ दुर्गा

पश्चिम बंगाल के कोलकता में ‘वेटिकन सिटी’ के रूप में दुर्गा पंडाल को दिखाने के बाद अब माँ दुर्गा को सेक्स वर्कर के रूप में दिखाया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार नवरात्रि का पवित्र त्योहार चल रहा है। हर कोई माँ अंबे की पूजा-अर्चना करता है औऱ उन्हें प्रसन्न करने की कोशिशें करता है। पश्चिम बंगाल में तो दुर्गा पूजा की धूम रहती है, लेकिन अब वक्त बदला है। ममता बनर्जी के शासनकाल में क्रिएटिविटी के नाम पर वहाँ एक बार फिर से सनातन संस्कृति पर कुठाराघात करने की कोशिश की गई है।

ताजा मामला नवदुर्गा की मूर्ति से जुड़ा है, जहाँ कोलकाता एक पंडाल में माँ दुर्गा को सेक्स वर्कर के तौर पर दिखाया गया है। यह करतूत कोलकाता के नावापारा दादाभाई संघ पूजा समिति की है, जहाँ माँ दुर्गा को सेक्स वर्कर के तौर पर प्रदर्शित किया गया है। इसका उद्घाटन टीएमसी नेता शत्रुघ्न सिन्ह, सौगत राय और मदन मित्रा ने किया है।

माँ अंबे को सेक्स वर्कर के रूप में दिखाने के पीछे जिस शख्स का हाथ है उसका नाम संदीप मुखर्जी है। वही इस पंडाल के कॉन्सेप्ट और थीम का डिजायनर है। इस मामले में मुखर्जी का कहना है, “वेश्यावृत्ति एक पेशा है। क्या यह आम लोगों के लिए एक पेशा है? हम कह सकते हैं हम किस पेशे में हैं। लेकिन क्या वे (सेक्स वर्कर) कह सकते हैं? क्योंकि हम उन्हें अलग दृष्टीकोण से देखते हैं। हमें इस दृष्टिकोण को बदलना चाहिए। हमारा प्रोजेक्ट समाज में बदलाव लाने के लिए है।”

संदीप मुखर्जी के मुताबिक, सामाज के दृष्टिकोण में सेक्स वर्करों के प्रति बदलाव लाने के लिए इस बार माँ को सेक्स वर्कर के तौर पर दिखाया गया है। हालाँकि, ये कोई पहली बार नहीं है, जब ऐसा किया गया हो। इससे पहले हाल ही में कोलकाता में ही श्रीभूमि दुर्गा पंडाल को ‘वेटिकन सिटी’ के रूप में दिखाया गया था। वेटिकल सिटी की ही तरह से दुर्गा पंडाल के बाहर चर्च के क्रॉस को दिखाया गया था। कुल मिलाकर ईसाइयत का प्रचार किया गया था।

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