उर्दू लेखिका

उर्दू की लेखिका इस्मत चुगतई श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर अपने हिंदू दोस्त को मांस खिलाती थी और ऐसा करके उसे बहुत सुकून और शांति मिलती थी.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बीबीसी ने हाल ही में उर्दू की लेखिका इस्मत चुगतई की जीवनी के कुछ अंश को प्रकाशित किया. बीबीसी द्वारा उर्दू लेखिका इस्मत चुगताई की आत्मकथा ‘कागजी है पैरहन’ के अनुवाद के मुताबिक ऑटो बायोग्राफी में लेखिका ने खुलासा किया है कि किस तरह से वो अपनी हिंदू पड़ोसन के यहाँ से भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति को चुरा लाई थीं और जन्माष्टमी के दिन धोखे से अपनी हिंदू दोस्त सुशी को मांस खिला देती थीं.

बता दें की लेखिका यह भी लिखती हैं की “उनके घर में टट्टी का अहाता बनाकर उसके पीछे बकरीद पर बकरे काटे जाते थे और उसके बाद उस मांस को कई दिनों तक बाँटा जाता था. उन दिनों में सुशी घर के अंदर बंद कर दी जाती थी”. उन्होंने लिखा की “जन्माष्टमी के मौके पर हिंदुओं में काफी धूमधाम से मनाया जा रहा था. पकवानों की खुशबू को सूँघकर अंदर जाने का मन करता. इतने में सुशी दिखी तो उसने उससे पूछा कि क्या है तो वो बोली कि भगवान आए हैं”.

गौरतलब है की बीबीसी के मुताबिक अपनी आत्मकथा में उर्दू की लेखिका इस्मत चुगतई आगे लिखती है की “वो चोरी से सुशी के बरामदे तक पहुँच गईं. इसी दौरान वहाँ पर सभी को टीका लगी रहीं एक औरत उसके माथे पर भी टीका चिपकाती चली गई”. इस्मत चुगतई ने लिखा की उन्होंने सुना था कि जहां टीका लगता है तो उतना गोश्त जहन्नुम को जाता है. यही सोचकर उसे उन्होंने मिटाना चाहा परन्तु अचानक वह रुक गई. इस बीच माथे पर टीका लगा होने के कारण बेधड़क पूजाघर तक चली गईं और वहाँ चाँदी के पालने में झूला झूल रहे भगवान श्रीकृष्ण को चुरा लिया.

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