वनखंडेश्वर महादेव

कासगंज जिले में स्थापित वनखंडेश्वर महादेव एक दुर्लभ और चमत्कारिक मंदिर हैं, यहां की मूर्ति को चोरी करने वाले चोरों ने खुद थाने में आकर सौंपी प्रतिमा.

सावन का महिना हो और महादेव के चमत्कारों की चर्चा ना हो, ऐसा हो ही नहीं सकता. भगवान शिव के अनेकों चमत्कार कलयुग में भी देखने को मिलते हैं. इन्हीं चमत्कारों में से एक का संबंध उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में स्थित वनखंडेश्वर महादेव मंदिर से हैं. कई दशकों पहले इस मंदिर की शिव प्रतिमा को अलीगढ़ के कुछ चोरों ने चुरा लिया था, चोरी के कुछ सालों बाद उनमें से कई चोरों की मौत होने लगी तो बचे हुए चोरों के मन में अपने किए गए पाप का अहसास हुआ और वे इस प्रतिमा को थाने में जमा करवाने खुद गए.

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ऑपइंडिया की विशेष रिपोर्ट के मुताबिक वनखंडेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास बहुत प्राचीनतम माना जाता है. स्थानीय लोग मानते हैं कि यहाँ स्थापित शिवलिंग भागीरथ के समय का है. सोरों गाँव के लोग पीढ़ियों से यहां भगवान शिव की उपासना करते आ रहे हैं. कासगंज के भागीरथ गुफा के समीप स्थित वनखंडेश्वर महादेव को इलाके के लोग अपना इष्टदेव मानते हैं. लगभग 5 फुट उंचे इस शिवलिंग की खासियत यह है कि इसमें एक चेहरे की आकृति बनी हुई है.

गौरतलब है की आजतक के एक लेख की माने तो वनखंडेश्वर महादेव जी को अलीगढ़ से 8 लाख रुपयों की जमानत देकर छुड़ाना पड़ा था. 26 फरवरी 1973 यानी 48 साल पहले मंदिर की मुख्य मूर्ति को अलीगढ़ के छह चोर चुरा कर ले गए थे. मूर्ति को चुराने वाले चोर एक के बाद एक संक्रामक बीमारियों से मरने लगे, फिर बचे हुए चोर मृत्यु के भय से उसी चुराई हुई मूर्ति को थाने में लौटने खुद आए. पुलिस ने इस चमत्कारिक मूर्ति को थाने में ही सुशोभित भी कर लिया. बाद में ग्रामीण वासियों को इस घटना की जानकारी मिली तो वे इसे लेने पहुंचे, पुलिस के मूर्ति देने से मना करने के बाद वे कोर्ट गए और कोर्ट ने मूर्ति की जमानत के लिए ग्रामीणों से 8 लाख रुपय जमा करवाने को कहा. इसलिए गांव के 4 किसानों ने अपनी जमीनें बेचकर 2-2 साख रुपय जोड़कर 8 लाख में मूर्ति की जमानत करवाई और पुनः मंदिर में स्थापित कर उत्सव भी मनाया.

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