वीरभद्र स्वामी मंदिर

अनंतपुर में स्थित वीरभद्र स्वामी मंदिर को लेपाक्षी मंदिर भी कहा जाता है, इस देवधाम का एक स्तंभ सदा ही हवा में रहता है, जिसका रहस्य अंग्रेज भी नहीं जान पाए.

भारत में अनेकों मंदिर ऐसे हैं जो खुद में रहस्य छुपाए हुए हैं, उन्हीं में से एक हैं वीरभद्र स्वामी मंदिर अथवा लेपाक्षी मंदिर. यह दिव्य मंदिर भगवान शिव, भगवान विष्णु और वीरभद्र को समर्पित हैं और यह अपनी प्राचीन इतिहास और रहस्य से अधिक आकर्षक लगता है. लेपाक्षी मंदिर का सबसे बड़ा रहस्य यह हैं की इसका एक स्तंभ सदा ही हवा में रहता है, हैरानी की बात यह भी है की आज तक कोई भी इस रहस्य को सुलझा नहीं पाया है.

लेपाक्षी मंदिर का इतिहास त्रेतायुग से जुड़ा हुआ है. ऑपइंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक कुछ मान्यताओं में माना गया है की जब लंका नरेश रावण, माता सीता का अपहरण करके ले जा रहा था, तब पक्षीराज जटायु ने माता सीता की रक्षा करने के लिए इसी स्थान पर युद्ध किया था. रावण के प्रहार से जटायु घायल होकर यहीं गिरे थे और बाद में माता सीता की खोज में आए श्री राम और अनुज लक्ष्मण से इसी स्थान पर मिले. यहां भगवान राम ने करुणा भाव से जटायु को अपने गले से लगा लिया था. उसी समय से इस स्थान के नाम ‘लेपाक्षी’ का प्रादुर्भाव हुआ.

मंदिर से जुड़ा एक ऐसा रहस्य है जो सबका ध्यान अपने ओर खींचता है, दरअसल परिसर का एक स्तंभ सदा ही हवा में रहता है. जी हां ये सत्य है और इस सत्य को अब तक कोई भी नहीं समझ पाया है की संभव हुआ तो हुआ कैसे? स्तंभ हवा में क्यों है यह जानने का प्रयत्न अंग्रेजों ने भी बहुत किया मगर वो कभी भी कामयाब नहीं हो पाए. उन्होंने इसे यहां से हटाने का भी प्रयास किया मगर इसमें भी वो फ़ैल हो गए.

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