विष्णुपद मंदिर

गया के विष्णुपद मंदिर में भगवान विष्णु के पदचिन्हों वाली धर्मशिला स्थापित हैं और पितरों के पिंडदान के लिए भी यह स्थान सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है.

भारत देश में पितरों के पिंडदान हेतु कई स्थान है, परन्तु उनमें से सबसे अधिक प्रमुख स्थान बद्रीनाथ का ब्रह्मकपाल क्षेत्र, हरिद्वार का नारायणी शिला क्षेत्र और बिहार का गया क्षेत्र को माना जाता है. गया में उसी स्थान पर भगवान विष्णु का विष्णुपद मंदिर भी स्थित हैं, सबसे दुर्लभ बात यह है की मंदिर के गर्भगृह में एक शिला स्थापित है, जिस पर भगवान नारायण के पदचिन्ह हैं. माना जाता है की इन चरणों को स्पर्श करते ही श्रद्धालुओं के सब पापों का नाश हो जाता हैं.

ऑपइंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार बताया जाता है की भगवान विष्णु के पदचिन्हों वाली धर्मशिला को स्वर्ग से लाया गया था. पुराणों में वर्णित है की गयासुर नामक दत्य ने तप करके भगवान से महाशक्तियों का आशीर्वाद लेकर उसका दुरपयोग करते हुए देवताओं पर आक्रमण करता, जिससे परेशान होकर सभी देवताओं ने भगवान विष्णु से प्रार्थना करी. देवताओं की प्रार्थना पर भगवान श्री हरी ने गयासुर का वध कर दिया, वध के बाद भगवान नारायण ने उसके सर को एक पत्थर पर रखा और अपने पैरों से उसके सर को दबा दिया.

माना जाता है की यह वही धर्मशिला है जिसे स्वर्ग से इस स्थान पर लाया गया है. पत्थर को पैरों से दबाने के कारण उस पत्थर पर श्री नारायण के चरणों के चिन्ह अंकित हो गए और गयासुर को भी मोक्ष मिल. बादमें गयासुर ने भी भगवान से यह वरदान माँगा कि जितनी भूमि पर गयासुर का शरीर है वह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाए और यहाँ पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति हो, तब से ही गया क्षेत्र पितरों की मुक्ति के लिए पवित्रतम पिंडदान क्षेत्र माना जाने लगा.

इसे भी जरुर ही पढिए:-

मंगलनाथ मंदिर: दुनिया भर के लोग कुंडली से मंगल दोष का यहां करवाते हैं निवारण

Leave a Reply

Your email address will not be published.

%d bloggers like this: