तालिबान

अफगानिस्तान में तालिबान के बढ़ते कब्जे के कारण भारत देश को इसका प्रभाव झेलना पड़ेगा, क्योंकि अरबों का निवेश इस कब्जे से डूब सकता है.

zee news की एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार इस समय अफगानिस्तान की जनता और सरकार एक ऐसे खतरे से जूझ रही है जिसे तालिबान (Taliban) कहा जाता है और आसान भाषा में कहें तो यह एक आतंकवादी संगठन है. जिसका निर्माण 1990 के दशक में हुआ और इस संगठन में ज्यादातर अफगानिस्तान और पाकिस्तान के कट्टरपंथी मुसलमान ही शामिल हैं. इसका उद्देश्य हर कब्जा की हुई धरती पर शरिया लागु करना होता है, शरिया का मतलब है की कट्टर इस्लामिक नियमों का लागु होना, शरिया के दौरान महिलाएं और लडकियाँ घरों से बाहर काम करने या स्कूल नहीं जा सकती और संगीत व फ़िल्में भी देखने पर पाबंदी लगा दी जाती है.

ज़ी न्यूज़ के एडिटर चीफ़ सुधीर चौधरी की एक रिपोर्ट के मुताबिक यदि तालिबान का पुरे अफगानिस्तान पर कब्जा होता है तो इसका सबसे ज्यादा असर भारत पर ही पड़ेगा. क्योंकि भारत ने अरबों का निवेश अफगानिस्तान में किया हुआ है. इस दौरान सुधीर चौधरी ने कहा की “हेरात शहर के पास जिस सलमा नाम के बांध का निर्माण भारत ने करवाया था उसे भी तालिबानियों ने अपने कब्जे में ले लिया है. इसे अफगान-इंडिया फ्रेंडशिप डैम के नाम से जाना जाता है”.

उन्होंने आगे कहा की “भारत ने अफगानिस्तान में करीब 23 हजार करोड़ का निवेश किया हुआ है. यहां तालिबानियों के कब्जे का मतलब होगा कि इस निवेश का पूरी तरह से डूब जाना. सलमा डैम पर कब्ज़ा करके तालिबान ने भारत को एक संकेत देने की कोशिश की है और अगर ऐसा ही चलता रहा तो एक दिन तालिबान काबुल में मौजूद अफगानिस्तान की संसद पर भी कब्जा कर लेगा, जिसका निर्माण भारत ने कराया था”.

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